किराये के मकान में डीएम

21 फरवरी 1991 को जब तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव जिले का उद्घाटन कर रहे थे उस वक्त उन्होंने यह घोषणा की थी कि अब बांका में विकास की गंगा बहेगी. यह घोषणा आज भी सपना ही बना हुआ है. बांका : जिला बनने के ढाई दशक बाद भी बुनियादी ढांचे को लेकर बांका बेहद […]

21 फरवरी 1991 को जब तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव जिले का उद्घाटन कर रहे थे उस वक्त उन्होंने यह घोषणा की थी कि अब बांका में विकास की गंगा बहेगी. यह घोषणा आज भी सपना ही बना हुआ है.
बांका : जिला बनने के ढाई दशक बाद भी बुनियादी ढांचे को लेकर बांका बेहद गरीब है. इन ढ़ाई दशकों में जिले भर की बात तो दूर, मुख्यालय तक में बुनियादी ढांचे का अपेक्षित निर्माण नहीं हो पाया.
स्थिति यह है कि आज भी बांका के दो शीर्ष पदाधिकारी डीएम और एसपी सरकारी आवास के अभाव में किराये के भवनों में रह रहे हैं. डीएम जहां सड़क निर्माण विभाग, वहीं एसपी जिला परिषद के निरीक्षण भवन में अपना आवास रखे हुए हैं. सच तो यह भी है कि यहां अनेक सरकारी कार्यालय निजी किराये के भवनों में चल रहे हैं. वहीं कई कार्यालय अनाधिकृत रूप से स्कूलों, होस्टलों अथवा अन्य सरकारी भवनों में चलाये जा रहे हैं.
विकास से मरहूम है जिला : 21 फरवरी 1991 को जब जिले का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव कर रहे थे उस वक्त उन्होंने यह घोषणा की थी कि अब बांका में विकास की गंगा बहेगी. बांकावासी को अब अपने जिले में ही सभी सुविधा मिलेगी. जिन अधिकारियों के लिए उनको भागलपुर जाना होता था अब वह उनको उनके जिले में ही मिल जायेंगे. अब आज जब जिला बने हुए 25 वर्ष हो चुके हैं तब भी जिले का वह विकास नहीं हो पाया है जो एक जिले का होता है.

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