सेहत से खिलवाड़. बनाये गये भवन, नहीं खुली जेनरिक दवा की दुकान
जेनरिक स्टोरों के जरिये मरीजों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने की सरकार की योजना जिले में फेल हो गयी है. गरीब मरीज बीमारी में ही अपनी सारी कमाई झोंक रहे हैं. ऐसे में सरकार व अधिकारियों को सजग होने की आवश्यकता है.
बांका : सरकार की नीतियों के अनुरूप जिले में गरीब मरीजों को सस्ती दवाएं नहीं मिल सकीं और न ही फिलहाल इसकी कहीं कोई संभावना दिख रही है. इस दिशा में जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंडों में जेनरिक दवा की दुकानें खोलने की पहल सरकार की एक कल्याणकारी नीति के तहत राज्य स्वास्थ्य समिति ने की थी. लेकिन धरातल पर उतारने के पहले ही यह योजना जिले में दम तोड़ गयी. जिला स्वास्थ समिति ने इसके लिए जिम्मेदारी का ठीकरा उन एजेंसियों के सर पर मढ़ दिया जिन्होंने जिले में जेनरिक दवाई स्टोरों के संचालन की संविदा ली थी.
लेकिन समिति ने इसके एवज में उनके खिलाफ क्या किया, इसका कोई संतोषजनक जवाब किसी के पास नहीं. इधर इस विभागीय अस्त व्यस्तता की वजह से जिले के खासकर गरीब मरीजों को जो सस्ते और सुलभ इलाज की उम्मीद बंधी थी वो बिखर कर रह गयी. जिला स्वास्थ्य समिति ने भी शायद इस स्थिति के बाद अपने हाथ खड़े कर दिये. तभी तो एजेंसियों के जेनरिक दवाई स्टोर खोलने से इनकार करने के बाद इसने सरकार की नीतियों को जिले में कारगर ढंग से लागू करने की दिशा में कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया. फलस्वरूप सरकार की नीतियां यहां धरी रह गयी.
अमरपुर, धोरैया व बाराहाट में शुरू किये गये थे स्टोर
पहले चार जगहों पर हुई पहल
जिले में यह योजना करीब 3 वर्ष पूर्व शुरू हुई थी. पहले चरण में मुख्यालय स्थित पुरानी अस्पताल परिसर के अलावा अमरपुर, धोरैया तथा बाराहाट में जेनरिक दवा स्टोर शुरू करने की पहल धरातल पर आरंभ हुई. इसके लिए प्री फेब्रिकेटेड स्ट्रक्चर वाले भवन भी बने. कटोरिया तथा रजौन में भी इसके लिए भवन बनाये गये. अमरपुर, धोरैया तथा बाराहाट में स्टोर शुरू भी हुए. लेकिन बाद में धोरैया एवं बाराहाट में बंद कर दिये गये. बांका में तो यह कभी चालू ही नहीं हुआ. अमरपुर में कहने को तो चल जरूर रहा है, लेकिन मोटा मोटी सिर्फ कागज पर.
स्टोर नहीं खुले, तो रद्द हुआ एग्रीमेंट
जिला स्वास्थ्य समिति के अनुसार आरंभिक दौर में जेनरिक दवाई स्टोर शुरू करने वाली दो एजेंसियों के एग्रीमेंट उनके स्टोर बंद हो जाने की वजह से रद्द कर दिये गये. जिला मुख्यालय तथा जिले के अन्य प्रखंडों में किन एजेंसियों के साथ राज्य स्वास्थ्य समिति का एग्रीमेंट था और उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गयी यह समिति के अधिकारियों को भी नहीं पता.
हालांकि वे यह जरूर स्वीकार करते हैं कि स्टोर खोलने की दिशा में पहल नहीं करने के साथ ही उन्होंने इकरारनामे का आगे नवीकरण कराने में भी दिलचस्पी नहीं दिखायी. फलस्वरूप उनका एग्रीमेंट स्वतः रद्द हो गया.
