बेपानी जिंदगानी. मतडीहा गांव में पेयजल संकट
जिले के मतडीहा गांव में एक भी सरकारी चापाकल चालू हालत में नहीं है. लोग नदी में चूआं खोद कर अपनी प्यास बुझाते हैं.
बांका : जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मतडीहा गांव के ग्रामीण एक एक बूंद पानी को तरस रहे हैं. इस भीषण गरमी में यहां के लोग पानी पीने के लिए या तो चांदन नदी से चुआंड़ी खोद कर ला रहे हैं या करीब आधा किलोमीटर पैदल चल कर दूसरे गांव से ला रहे हैं. तब जाकर उक्त गांव के ग्रामीणों की प्यास बूझ रही है. 800 से एक हजार की आबादी वाले गांव में एक भी सरकारी चापाकल ठीक नहीं है. हालांकि पूरे गांव में पांच सरकारी चापाकल हैं. लेकिन सभी के सभी चापाकल खराब पड़े हुए हैं.
कहते हैं ग्रामीण: मतडिहा गांव में सभी प्रकार के लोग रहते हैं जिसमें कुछ संभ्रांत, मध्यमवर्गीय एवं निम्नवर्गीय भी शामिल हैं. सघन आबादी वाले इस गांव के ग्रामीण श्याम साह, प्रकाश साह, उत्पल सिंह, राजकुमार साह, यमुनाकांत दूबे एवं दीपक साह ने बताया कि कहने को तो सरकारी कार्यालयों में पांच सरकारी चापाकल कागजों में अंकित हैं लेकिन सिर्फ कागजों तक ही सिमटे हुए हैं. हकीकत में इस गांव के सभी चापाकल खराब हैं. एक के बाद एक चापाकल खराब होते चले गये लेकिन विभाग इस ओर सुस्त बना हुआ है. जैसे जैसे चापाकल खराब होते गये इसकी सूचना हम ग्रामीणों के द्वारा पीएचइडी विभाग को दे दी गयी. बावजूद इसके सभी चापाकल खराब होने के बाद भी आज तक विभाग इसे ठीक कराने में दिलचस्पी नहीं ले रही है. जिस वजह से हम ग्रामीण इस भीषण गरमी में पानी के लिए तरस रहे हैं. हालांकि इसकी सूचना स्थानीय विधायक को भी दी गयी, लेकिन उनके द्वारा भी इस ओर किसी भी प्रकार का साकारात्मक पहल नहीं की गयी है.
कहते हैं अधिकारी
मतडिहा गांव के सभी चापाकल खराब पड़े हैं इसकी सूचना कार्यालय को अब तक नहीं मिली है. विभाग से कर्मी को भेज कर जल्द ही इसकी जांच करायी जायेगी और पानी की समस्या से जूझ रहे उक्त गांव के ग्रामीणों को इससे निजात दिलायी जायेगी.
मनोज कुमार चौधरी, कार्यपालक अभियंता पीएचइडी, बांका
