अल्ट्रा पावर प्रोजेक्ट से होगा बांका का कायाकल्प

बांका : बांका जिले के ककबारा में प्रस्तावित चार हजार मेगावाट क्षमता वाले अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. बांका स्थित अल्ट्रा पावर प्रोजेक्ट से बिहार को दो हजार मेगावाट बिजली मिलनी है. प्रोजेक्ट में बिजली उत्पादन इकाई के लिए कोल लिंकेज की भी व्यवस्था हो गयी है. इसके […]

बांका : बांका जिले के ककबारा में प्रस्तावित चार हजार मेगावाट क्षमता वाले अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. बांका स्थित अल्ट्रा पावर प्रोजेक्ट से बिहार को दो हजार मेगावाट बिजली मिलनी है. प्रोजेक्ट में बिजली उत्पादन इकाई के लिए कोल लिंकेज की भी व्यवस्था हो गयी है.

इसके लिए जमीन पहले ही चिह्नित की जा चुकी है. मालूम हो कि इस उत्पादन इकाई से बिहार के अतिरिक्त झारखंड को एक हजार मेगावाट तथा उत्तर प्रदेश एवं कर्नाटक को पांच-पांच सौ मेगावाट बिजली मिलनी है. इस संबंध में चारों राज्यों ने अपनी सहमति दे दी है. बिहार और झारखंड द्वारा भी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये जा चुके हैं.

यूपी और कर्नाटक भी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने की दिशा में कई कदम आगे बढ़ चुके हैं. चार हजार मेगावाट के इस पावर प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी पावर फाइनांस कॉरपोरेशन के अनुसार जल्द ही यह योजना धरातल पर होगी. इस योजना का काम अब आगे बढ़ाया जा रहा है.

जमीन व पानी का बंदोबस्त करेगी राज्य सरकार : प्रोजेक्ट के लिए जमीन व पानी का बंदोबस्त बिहार सरकार को करना है. प्लांट के लिए पानी का इंतजाम गंगा से किये जाने की योजना है. सुलतानगंज स्थित गंगा घाट से करीब 65 किलोमीटर की दूरी पर बांका जिले के प्रभावती नगर में इस योजना को लगाया जाना है.
यह स्थान बांका जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर कटोरिया रोड में हैं. योजना के लिए 120 क्यूसेक पानी की जरूरत होगी. इसको लिफ्ट कर सुलतानगंज से प्रोजेक्ट स्थल पर लाया जायेगा. इस योजना के लिए 25 सौ एकड़ जमीन की जरूरत है. केंद्र सरकार की स्वीकृति एवं बिहार के साथ हुए समझौते के बाद इस योजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ कर दी गयी है. योजना करीब 20 हजार करोड़ की होगी.
योजना के जमीन पर उतरते ही इस क्षेत्र का कायाकल्प हो जायेगा.
समझौते के बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू : इस प्रोजेक्ट से बिहार को दो हजार मेगावाट बिजली के आवंटन की सैद्धांतिक स्वीकृति के साथ-साथ वित्तीय वर्ष 2015-16 में 20 करोड़ की राशि बिहार स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड के माध्यम से योजना की नोडल एजेंसी पावर फाइनांस कॉरपोरेशन कन्सल्टिंग लिमिटेड (पीएफसी) को उपलब्ध कराने के लिए आवंटन की स्वीकृति एक माह पूर्व 15 मार्च को ही प्रदान कर दी गयी. सरकार के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने अवर सचिव सह निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी, ऊर्जा विभाग बिहार को इस संबंध में पत्र लिख कर आदेश जारी किया.
यह राशि जमीन अधिग्रहण के लिए उपयोग में लायी जायेगी. इस मद में 2 अरब 23 करोड़ रुपये की राशि का बजटीय प्रावधान है. अपने पत्र में प्रधान सचिव ने कहा है कि यह राशि मुख्य शीर्ष 4801-बिजली योजनाओं पर पूंजीगत परिव्यय- उप मुख्य शीर्ष 02 ताप विद्युत उत्पादन लघु शीर्ष 190 सार्वजनिक क्षेत्र तथा अन्य उपक्रमों में निवेश माप संख्या 10 उप शीर्ष 102 बिहार स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड की परियोजना विपत्र शीर्ष 5401 निवेश के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2015-16 में उपबंधित राशि से भुगतेय होगा. ज्ञात हो कि यह योजना करीब 20 हजार करोड़ की है.
दूर हो चुकी हैं प्रोजेक्ट को लेकर सभी अड़चनें : योजना के क्रियान्वयन में केंद्र सरकार के स्वीकृति के बावजूद प्रोजेक्ट से उत्पादित बिजली के आवंटन को लेकर कोई ठोस निर्णय और समझौता न हो पाना भी देरी की एक मुख्य वजह रही, लेकिन बिहार को इसकी अपेक्षित मांग के अनुरूप बिजली आपूर्ति की सहमति तथा झारखंड के अलावा यूपी और कर्नाटक से बातचीत होने के बाद इस योजना को लेकर लगभग सभी अड़चने अब दूर हो गयी हैं.
झारखंड सरकार की इस योजना से बिजली की दावेदारी पर खास नजर थी. झारखंड सरकार द्वारा समय पर जमीन उपलब्ध नहीं करा पाने की वजह से रिलायंस पावर ने 2015 के मई में ही तिलैया अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया था.

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