कार के धक्के से साइकिल सवार घायल

कटोरिया : कटोरिया-देवघर मुख्य मार्ग पर कोल्हुआ मोड़ के निकट शनिवार की शाम कार ने साईिकल सवार को धक्का मार दिया. जिसमें साइकिल सवार बुरी तरह से जख्मी हो गया. जख्मी समर राय ग्राम खिजुरिया को ग्रामीणों के सहयोग से रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां चिकित्सकों ने घायल का प्राथमिक उपचार किया. जख्मी […]

कटोरिया : कटोरिया-देवघर मुख्य मार्ग पर कोल्हुआ मोड़ के निकट शनिवार की शाम कार ने साईिकल सवार को धक्का मार दिया. जिसमें साइकिल सवार बुरी तरह से जख्मी हो गया. जख्मी समर राय ग्राम खिजुरिया को ग्रामीणों के सहयोग से रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां चिकित्सकों ने घायल का प्राथमिक उपचार किया. जख्मी की स्थिति खतरे से बाहर है. घटना के बाद चालक कार समेत मौके से भाग निकलने में सफल रहा.

छोटे बच्चे गोंद को रूमाल पर उड़ेल कर सूंघते हैं
डैंडराइट में चिपक रहा देश का भविष्य
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर जहां एक ओर शराब के नशे में डूबे बड़ी आबादी को नई जिंदगी देने का प्रयास किया है. वहीं दूसरी ओर डैंडराइट में चिपक रहे नौनिहालों को भी खतरनाक नशा से मुक्ति दिलाने की जरूरत है.
कटोरिया : यूं तो डेंडराईट या सेल्यूशन नामक गोंद का उपयोग मिस्त्री की दुकान, गैरेज व लकड़ी कारीगरों द्वारा दो चीजों को जोड़ने में उपयोग किया जाता है. लेकिन आज देश के होनहार भविष्य यानि समाज के बिल्कुल ही अबोध बच्चे इसका प्रयोग नशा के रूप में कर रहे हैं. जो बच्चे इस अति उड़नशील व ज्वलनशील केमिकल का प्रयोग नशा के रूप में करते हैं, वे धीरे-धीरे इसका गुलाम होने लगते हैं. या यूं कहें कि एक बार इससे चिपक कर छूट पाना नामुमकिन हो जाता है.
डेंडराइट का नशा के रूप में उपयोग भी बड़ा ही अजूबा है. छोटे-छोटे बच्चे इसे रूमाल पर उड़ेल कर इसे सूंघते हैं, फिर नशा चढ़ते ही वे रूमाल को चूसने लगते हैं. देखते ही देखते मासूम चेहरा दानवी हो जाता है, मदहोश हो जाता है, कुछ देर बाद लंबे समय तक के लिए सुस्त भी हो जाता है. डेंडराइट के बढ़ते डिमांड की वजह से यह छोटे-छोटे पान दुकान,
स्टेशनरी दुकानों से लेकर फुटपाथों पर भी बिक रहा है. गुटखा, शराब सहित अन्य घातक नशीली पदार्थों की बिक्री की तरह डेंडराइट के प्रयोग पर भी सख्ती की जरूरत है. कम से कम यह अबोध बच्चों को तो सहजतापूर्वक प्राप्त नहीं हो, इसकी व्यवस्था जरूर होनी चाहिए.
गरीब तबके के बच्चे ज्यादा प्रभावित
डेंडराईट, रबर सोल्यूशन, फेवीकोल, थीनर आदि का व्यवहार वैकल्पिक नशे के रूप में किया जाता है. इन चीजों का इस्तेमाल ज्यादातर वैसे बच्चों द्वारा किया जाता है, जो बहुत गरीब वर्ग से आते हैं, कूड़ा-कचरा बीनने का काम करते हैं. ये वैसे बच्चे होते हैं, जिन बच्चों तक पहुंचना या ध्यान देना अक्सर हमारी सामाजिक जिम्मेदारियों द्वारा वहन नहीं किया जाता. जिससे वे समाज की मुख्यधारा से दूर होते जाते हैं. इन बच्चों के जीवन में सुधार हेतु ईमानदार प्रयास की जरूरत है.
कहते हैं चिकित्सक
इस संबंध में रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा योगेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा कि इस तरह का व्यसन करने वाले बच्चे कई तरह के गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं. उनमें चिड़चिड़ापन आने लगता है. फेफड़ा व दिमाग पर काफी बुरा असर पड़ता है.

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