कैसी सहूलियत. जेनेरेटरों के शोर ने उड़ायी शहरवासियों की नींद

ऐसे तो बहरे हो जायेंगे लोग शहर के विभिन्न भागों में चल रहे जेनेरेटर से ध्वनि तथा वायु प्रदूषण हो रहा है. इससेे शहरवासी बीमार पड़ रहे हैं. अपनी सुनने और देखने की क्षमता खो रहे हैं. बांका : शहरीकरण के नाम पर बांका को जो सबसे बड़ा तोहफा मिला है, वह है ध्वनि और […]

ऐसे तो बहरे हो जायेंगे लोग

शहर के विभिन्न भागों में चल रहे जेनेरेटर से ध्वनि तथा वायु प्रदूषण हो रहा है. इससेे शहरवासी बीमार पड़ रहे हैं. अपनी सुनने और देखने की क्षमता खो रहे हैं.
बांका : शहरीकरण के नाम पर बांका को जो सबसे बड़ा तोहफा मिला है, वह है ध्वनि और वायु प्रदूषण. इन दोनों ही तरह के प्रदूषणों ने शहरवासियों की नींद उड़ा कर रख दी है. शहर में तकरीबन दिन रात चलने वाले जेनरेटरों से निकलती कर्कश कानफाड़ू ध्वनि और जहरीले धुएं ने शहरवासियों का जीना मुहाल कर रखा है. ध्वनि एवं वायु प्रदूषण के बढ़ते दुष्प्रभाव की वजह से शहरवासियों के सुनने और देखने की क्षमता भी प्रभावित होने लगी है.
लोग चिड़चिड़े होने लगे हैं. राज्य और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इन सबसे बेखबर बना हुआ है. सुरक्षित सीमा के अंदर प्रदूषण नियंत्रण के उच्च न्यायालय के सख्त आदेश के बाद भी इन प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों पर कोई असर नहीं हुआ है. इस गंभीर समस्या को लेकर नगर पंचायत प्रशासन भी मौन है. इधर शहर के लोग त्राहिमाम करते हुए यथा स्थिति पर घातक ध्वनि एवं वायु प्रदूषण झेलते अपना स्वास्थ्य गलाने पर विवश है. सिर्फ जेनेरेटर ही नहीं डीजे और लाउड्स्पीकर भी ध्वनि प्रदूषण का मुख्य सबब बने हुए है. विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के नाम पर डीजे और लाउड्स्पीकरों से जमकर ध्वनि प्रदूषण फैलाया जा रहा है.
इन्हें देखने सुनने वाला कोई नहीं. अगर इनकी वजह से होने वाले ध्वनि प्रदूषण से लोग त्राहिमाम कर रहे हैं, तो अपनी बला से. ज्ञात हो कि प्रशासनिक स्तर पर रात दस बजे के बाद इन यंत्रों के बजाने पर रोक है. पर्व त्योहारों पर इन ध्वनि विस्तार यंत्रों का शोर और भी ज्यादा तेज हो जाता है. लेकिन रोक के इस प्रशासनिक आदेश की यहां जमकर धज्जियां उड़ायी जा रही है.
जेनेरेटरों का हो रहा व्यावसायिक उपयोग : जेनरेटरों का इस्तेमाल शहर में समानांतर विद्युत व्यवस्था के रूप में हो रहा है. निजी उपयोग के साथ – साथ बड़े पैमाने पर जेनरेटरों का व्यावसायिक उपयोग भी शहर में हो रहा है. हर माह जेनरेटरों के जरिये लाखों रुपये का वित्तीय कारोबार हो रहा है. हद तो यह है कि इसी बहाने बिजली चोरी का भी धंधा शहर में बड़े पैमाने पर फल फूल रहा है. शहर में तीन दर्जन से ज्यादा जेनरेटर व्यवसाय चल रहे हैं.
इनमें आधे दर्जन जेनरेटरों के भरोसे शहर के मुख्य हिस्से के आधे इलाके में बिजली व्यवस्था है. कहने को ये जेनेरेटर चलाकर बिजली आपूर्ति करते हैं. लेकिन शर्त ये रखते हैं कि बिजली रहने पर जेनरेटर से पावर आपूर्ति नहीं होगी. ऐसे में जेनरेटर के साथ – साथ बिजली इन व्यवसायियों के लिए निजी संपत्ति बन कर रह गयी है.
ये हैं साइलेंट जोन : राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के अंतर्गत अस्पताल, क्लिनिक, स्कूल, न्यायालय, धार्मिक स्थल, शिक्षण संस्थान तथा आबादी वाले मुहल्ले साइलेंट जोन श्रेणी में रखे गये हैं. लेकिन बांका शहर में इन नियमों का कोई अनुपालन नहीं हो रहा.
हो रहा व्यवसायिक उपयोग
प्रभात पड़ताल
क्या हैं ध्वनि के मानक
क्षेत्र दिन रात
औद्योगिक 75 डेसीबल 70 डेसीबल
व्यावसायिक 65 डेसीबल 55 डेसीबल
रिहाईशी 55 डेसीबल 45 डेसीबल
साइलेंट जोन50 डेसीबल 40 डेसीबल
ध्वनि प्रदूषण से क्षति
बहरापन अर्थात सुनने की क्षमता में कमी
तनाव, रक्तचाप और चिड़चिड़ापन
स्नायु तंत्र को भी प्रभावित करता है ध्वनि प्रदूषण
जेनरेटर के जहरीले धुएं से स्वास्थ्य संबंधी रोग एवं खून में ऑक्सीजन की कमी
जहरीले धुएं से आंखों को भी भारी नुकसान
ध्वनि प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्र
कटोरिया रोड
डोकानियां मार्केट
अलीगंज
कचहरी रोड
करहरिया रोड
पुरानी बस स्टेंड
शिवाजी चौक
गांधी चौक
ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ नियम
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत 5 साल की सजा एवं 1 लाख रुपये तक का अर्थदंड
न्यायालय का आदेश कि रात दस बजे के बाद डीजे सहित सभी तरह के ध्वनि विस्तार यंत्रों पर रोक
यहां चलते हैं जेनेरेटर
शहर के प्राय: सभी सरकारी दफ्तरों, बैंकों, डाक घर, कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, होटलों एवं भोजनालयों के अलावा कई प्रमुख स्कूलों में बिजली रहते ही जेनरेटर चलते रहते हैं. इधर गर्मी के दस्तक के साथ ही इन जेनरेटरों का शोर काफी बढ़ गया है. जिन्हें जेनरेटर की सुविधा नहीं है वैसे आम लोगों की आबादी शहर में अधिक है. लेकिन मामूली आबादी के सुख के लिए शहर की इस बहुसंख्य आबादी को प्रदूषण का जहर पीना पड़ रहा है.

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