जिला क्रिकेट संघ द्वारा नहीं कराया गया खेल का आयोजन

क्रिकेट खिलाडि़यों में छायी है मायूसी कभी जिले का आरएम के मैदान खिलाड़ियों के कोलाहल से गुंजायेमान रहता था, जो आज वीरान है. नवंबर से लेकर जनवरी तक जहां जिले के कोने- कोने से खिलाड़ी पहुंचते थे और अपनी प्रतिभा को जिला के अन्य प्रतिभावान खिलाड़ियों से लोहा लेते थे. जिले की क्रिकेट को किसकी […]

क्रिकेट खिलाडि़यों में छायी है मायूसी

कभी जिले का आरएम के मैदान खिलाड़ियों के कोलाहल से गुंजायेमान रहता था, जो आज वीरान है. नवंबर से लेकर जनवरी तक जहां जिले के कोने- कोने से खिलाड़ी पहुंचते थे और अपनी प्रतिभा को जिला के अन्य प्रतिभावान खिलाड़ियों से लोहा लेते थे. जिले की क्रिकेट को किसकी नजर लग गयी है इसको बताने वाला कोई नहीं है. डयूज बॉल अब टेनिस में परिणत हो गया है. खेतों में टेनिस बॉल से खिलाड़ी खेल रहे है. इस कारण ड्यूज बॉल से जो प्रतिभा सामने आनी चाहिए वह नहीं आ रही है. जिसे जिले के युवा निराश है.
बांका : क्रिकेट खेल नहीं होने की वजह से यहां के युवा अपनी प्रतिभा को नहीं निखार पा रहे है. संघ में विभिन्न पदों पर विराजमान पदाधिकारी कभी भी समय पर जिला क्रिकेट लीग का आयोजन नहीं करते है. जिस कारण जिले की प्रतिभा में जंग लग रहा है. क्रिकेट खेल के आयोजन अन्य संस्था द्वारा भी समय-समय पर आयोजित की जाती थी.
जिसमें जिला क्रिकेट संघ द्वारा उन्हें सहयोग भी किया जाता रहा था, लेकिन करीब तीन से चार वर्षों से संघ के पदाधिकारी की दिलचस्पी नहीं दिखाने की वजह से किसी भी टूर्नामेंट का आयोजन नहीं हो पा रहा है. जिससे खेल प्रेमी मायूस है. ऐसे में सबाल उठता है कि जब खिलाड़ियों को बार बार कसौटी से नहीं गुजारा जायेगा तो वह जिले का नाम दूसरे जिले या प्रदेशों में कैसे करेंगे.
सिर्फ एक टूर्नामेंट से ही तय होते है जिले के खिलाड़ी: पिछले तीन सालों से सिर्फ जिला लीग ही हो रहा है. अन्य टूर्नामेंट के नहीं होने की वजह से जिले के खिलाड़ी सिर्फ एक ही टूर्नामेंट खेल पाते है. जिस कारण जब जिले की टीम बाहर खेलने जाती है किसी तरह खिलाड़ियों का चयन कर खेलने भेज दिया जाता है. जिससे राज्यस्तरीय टूर्नामेंट के पहले मैच में बांका की टीम ढेर हो जाती है.
खिलाड़ियों व खेल प्रेमियों में छायी मायूसी : क्रिकेट खिलाड़ियों एवं खेल प्रेमियों में टूर्नामेंट के आयोजन नहीं होने से मायूसी छायी हुई है. शुलभ कश्यप, रणधीर सिंह, सुजीत कुमार झा, सत्य प्रकाश, मुकेश सिंह, राकेश कुमार, मुन्ना कुमार, सींटू कुमार ने बताया कि जिला क्रिकेट संघ द्वारा जिला लीग का आयोजन नहीं किया जा रहा है. इस आयोजन से लोगों को एक मनोरंजन का साधन मिलता था. वही खिलाड़ी अपने खेल का प्रदर्शन करते थे.
जिला क्रिकेट एसोसिएशन के द्वारा साल में एक बार खेल का आयोजन कराया जाता है. बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के द्वारा जो फंड आता है वह सालाना होने वाले खेल में खर्च हो जाता है. शहर के अन्य गणमान्य लोगों को भी क्रिकेट के खेल को जिंदा रखने के लिए सहयोग करने की जरूरत है. अगर वह सहयोग करने के लिए तैयार है तो जिला क्रिकेट एसोसिएशन तन मन से सहयोग को तैयार है.

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