फोर्टवीन, बांड लाइट, कोरेक्स आदि दवाअों की आसान है उपलब्धता
बिना डॉक्टर की परची के भी मेडिकल स्टोर से मिल जाती है दवा
बांका : जिले की युवा पीढ़ी पर धीरे-धीरे नशे ने अपना जाल फैलाना शुरू कर दिया है. इसकी चपेट में आकर स्कूली बच्चे व युवक नशे के शिकार हो रहे हैं. सिर्फ बांका शहर की बात की जाये, तो शायद ही कोई जगह बची हो, जहां इन नशेड़ियों अपना सेफ जोन न बनाया हो. मौका पाते ही ये अपनी नशे की लत पूरी कर लेते हैं.
अमरपुर बस स्टैंड के पीछे बना मंदिर, चांदन नदी का किनारा, आरएमके हाई स्कूल का हॉस्टल, बालिका मध्य विद्यालय के समीप बने यात्री शेड के बगल में ये युवा खुलेआम अपना जीवन बरबाद कर रहे हैं. यहां दिन-रात आपको युवा गांजा व फोर्टवीन का उपयोग करते मिल जायेंगे. इससे यहां के समाजसेवी, बुद्धिजीवी तथा अभिभावक चिंतित हैं.
रात को भी उड़ाते हैं धुआं: बात यहीं खत्म नहीं होती है. कई स्थानों पर तो रात के अंधेरे में इन नशेड़ियों की स्पेशल क्लास चलती है, जो शराब से लेकर गांजे का धुआं उड़ाते नजर आ जाते हैं. ताज्जुब यह कि पुलिस की गश्ती गाड़ी कई बार इस रास्ते से गुजरती है, लेकिन नजर नहीं पड़ती है. शहर में कई ऐसी दुकानें हैं, जहां पर नशीले सामान आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं.
युवा वर्ग में सबसे ज्यादा फोर्टवीन और बांड लाइट का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है. ये अपनी जिंदगी को बरबाद कर रहे हैं.
स्कूली बच्चे भी आ रहे चंगुल में
स्कूली बच्चों में नशे का चलन बढ़ा है. कई मेडिकल दुकानदार इन बच्चों को फोर्टवीन का इंजेक्शन, कोरेक्स कफ सिरप आदि बिना किसी चिठ्ठे के दे देते हैं. स्वास्थ्य विभाग के वरीय पदाधिकारियाें ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया है. आसानी से उपलब्ध होने के कारण भी युवा इसकी आदत पकड़ रहे हैं.
कहते हैं चिकित्सक: मामले को लेकर सदर अस्पताल बांका के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ शैलेंद्र कुमार ने बताया कि युवा पीढ़ी में फोर्टवीन के उपयोग से काफी बीमारी घर कर सकती है. इसके ओवर डोज से सांस फूलना, पल्स रेट गिर जाना, पेशाब कम होना, होंठ नीले रंग का हो जाना, चेहरा व हाथ पैर फूल जाना आदि हो सकता है. साथ ही इससे हाइपर टेंशन (उच्च रक्तचाप) की बीमारी हो सकती है. इस दवा का प्रयोग चिकित्सक अत्याधिक दर्द को कम करने या गंभीर रोगाें के नियंत्रण में करते हैं.
