फोटो : 27 बांका 01 : पीडि़त की तस्वीर सरकारी कर्मियों की बेरुखी से बढ़ी परेशानीप्रतिनिधि, पंजवाराभूखे को दाना नहीं पेट भरे भोजन वाला कहावत क्षेत्र में सरकारी कर्मी की मनमानी से चरितार्थ हो रहा है. सरकार द्वारा गरीबों के लिये चलायी जा रही इंदिरा आवास योजना यहां के मजलूम लोगों को दिवास्वप्न सा प्रतीत होता है. जबकि कई ऐसे व्यक्ति को योजना का लाभ दिया जा रहा है. जिसका या तो पूर्व से पक्का मकान है और उनके मां और पिताजी के नाम से योजना मद में लाभ ले रहे है. मामला पंजवारा स्थित एक निहायत ही गरीब परिवार से संबंधित है. जो खुले आसमान में जीने को मजबूर है. जबकि सरकार द्वारा जारी बीपीएल परिवार की सूची में उसे आठ अंक प्राप्त है. अपनी गरीब को कोस रहा सीताराम लहेरी किसी तरह प्लास्टिक के बोरे को फाड़ कर उसकी रस्सी बना कर बेचता है. तक कहीं जाकर उसके दो विकलांग बच्चे के नसीब में भोजन मिल पाता है. सरकार की बेरुखी पर सीताराम ने बताया की उसे भी कब का इंदिरा आवास का लाभ मिल जाता अगर उसने बिचौलिये को 10 हजार रुपये दे दिये होते. हालांकि सीताराम लहेरी की कटेगरी के 13 अंक वालों को योजना का लाभ दिया जा चुका है. लेकिन पता नहीं कब तक सीताराम को पूस की रात वाली ठंड से निजात मिलेगी.क्या कहते हैं बीडीओलाभुक स्वयं आकर उनसे मिलें, उनको इंदिरा आवास मिल जायेगी. इरफान अकबर, बीडीओ, बाराहाट
खुले आसमान में रात बिता रहे हैं गरीब
फोटो : 27 बांका 01 : पीडि़त की तस्वीर सरकारी कर्मियों की बेरुखी से बढ़ी परेशानीप्रतिनिधि, पंजवाराभूखे को दाना नहीं पेट भरे भोजन वाला कहावत क्षेत्र में सरकारी कर्मी की मनमानी से चरितार्थ हो रहा है. सरकार द्वारा गरीबों के लिये चलायी जा रही इंदिरा आवास योजना यहां के मजलूम लोगों को दिवास्वप्न सा प्रतीत […]
