सरकारी व्यवस्था का अभाव, धान की उपज बनी घाव

शंभुगंज : प्रखंड क्षेत्र के आमजनों का मुख्य पेशा खेती है. इस प्रखंड में कोई भी छोटा या बड़ा कारखाना नहीं है. खेती से होने वाली आमदनी से ही अपने व अपने बच्चों को पढ़ाना या शादी-विवाह सहित अन्य कामों को करना होता है. यहां के किसानों द्वारा मुख्य दो फसल रबी और खरीफ की […]

शंभुगंज : प्रखंड क्षेत्र के आमजनों का मुख्य पेशा खेती है. इस प्रखंड में कोई भी छोटा या बड़ा कारखाना नहीं है. खेती से होने वाली आमदनी से ही अपने व अपने बच्चों को पढ़ाना या शादी-विवाह सहित अन्य कामों को करना होता है. यहां के किसानों द्वारा मुख्य दो फसल रबी और खरीफ की खेती की जाती है. धान रोपाई से लेकर अंत तक किसान अपने बल बूते डीजल पंप से पटवन करते हैं.

सिंचाई का कोई भी सही साधन नहीं है. हनुमना डैम से निकले केनाल से ही सिंचाई का एक मात्र साधन है, जो पूरे क्षेत्र तक नहीं जा पाता है. लाचार होकर किसान कर्ज लेकर धान की रोपाई करते हैं. अब किसान धान तैयार कर बिचौलियों के हाथों बेचने को मजबूर हैं, क्योंकि धान रोपाई के समय लिये गये कर्ज व गेहूं बोआई के लिए पैसे की जरूरत है. ऐसे में धान कम कीमतों में बिचौलियों के हाथों बेचने को किसान मजबूर हो गया है.
किसी भी पंचायत के प्रखंड मुख्यालय में सरकारी धान क्रय केंद्र नहीं खोला गया है. यहां के किसानों को वित्तीय वर्ष 2014-15 का डीजल अनुदान की राशि का भुगतान नहीं किया गया है. यहां तक की विरनौधा पंचायत के किसानों को वित्तीय वर्ष 2013-14 का भी डीजल अनुदान भुगतान अभी तक नहीं किया है. हालांकि, सरकार द्वारा कृषि को बढ़ावा के लिए कई प्रकार की योजना चलायी जा रही है.
किसानों की सब्सिडी पर बीज खरीदने की राशि दी जाती है, लेकिन कागजी प्रक्रिया व सब्सिडी का भुगतान बैंक खाता पर करने को लेकर अधिकांशत: किसान सब्सिडी के लाभ से वंचित रह जाते है. वहीं रबी फसल के लिए किसानों को अनुदान पर श्री विधि से गेहूं का बीज जूरी टीलेट प्रतिक्षण मसूर, चना, मुख्यमंत्री तीव्रता बीज योजना के अंतर्गत किसानों के बीच वितरण किया जा रहा है, लेकिन अनुदान की राशि तुरंत भुगतान नहीं होने व बैंक खाता पर भुगतान के माध्यम से छोटे किसान इस योजना के लाभ से वंचित रह जाता है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व बीएओ द्वारा क्षेत्र में अधिक वर्षा होने की सूचना विभाग को देकर वित्तीय वर्ष 2014-15 का आया हुआ डीजल अनुदान की राशि विभाग को लौटा दिया गया है.
* कहते हैं क्षेत्र के किसान
रामचुआ के किसान अखिलानंद सिंह ने बताया कि हमलोगों का खेत बदुआ कमान एरिया सिंचाई में रहते हुए भी आज तक केनाल से खेत में पानी नहीं आया. जिस कारण डीजल मशीन द्वारा धान की रोपाई हुई और अब गेहूं की बोआई भी डीजल मशीन द्वारा कर रहे है, वहीं गुलनी कुशाहा के किसान उपेंद्र नारायण सिंह ने बताया कि धान की तैयारी कर स्थानीय व्यवसायी के हाथों कम कीमत में बेच कर उसी पैसे से गेहूं की खेती कर रहे है. अभी तक पंचायत पैक्स द्वारा धान का क्रय नहीं किया जा रहा है.
वहीं सोनडीहा के किसान महेश्वरी प्रसाद यादव ने बताया कि अनुदान की राशि किसानों को देने की बात सरकार द्वारा किसान को धोखा देना है, क्योंकि कृषि यंत्र जितने अनुदान राशि देने के बाद किसान को दिया जाता है. उतनी राशि में कोई भी कृषि यंत्र आम रूप से दुकान पर मिलता है. फिर किसानों को अनुदान राशि पर कृषि यंत्र लेने से क्या फायदा है. वहीं झालुचक के किसान शिवशंकर सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा अनुदान राशि पर उन्नत किसान का बीज नहीं दिया जाता है.
वहीं बेलारी के किसान मो. बदरूजमा उर्फ कलीम ने बताया कि हम लोग मेहनत करके खेती करते हैं, लेकिन फसल में हुए बीमारी की देख-रेख की सरकार द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. इन्होंने बताया कि लगभग 2 हेक्टेयर में कतरनी धान लगाये थे, लेकिन धान में बीमारी लग जाने से कृषि सलाहकार सहित कृषि पदाधिकारी को सूचना दिया गया, लेकिन किन्हीं के द्वारा खेत पर आकर उचित सलाह नहीं दी गयी.
* उपजाऊ क्षेत्र
प्रखंड में कृषि योग भूमि 14282 हेक्टेयर है, जिसमें संचित भूमि 8581 हेक्टेयर है. प्रखंड की जनसंख्या 173165 है.
* कहते हैं बीएओ
बीएओ अभिमन्यु कुमार शर्मा ने बताया कि अभी तक हमें पूर्व के बीएओ द्वारा चार्ज नहीं दिया गया है.
* कहते हैं बीसीओ
बीसीओ संजीव कुमार ने बताया कि अभी तक किसी भी पैक्स को बैंक द्वारा सीसी खाता नहीं दिया गया है. धान खरीदारी के लिए तैयारी की जा रही है. जब सभी पैक्सों का बैंक द्वारा सीसी खाता चालू किया जायेगा, तो धान खरीदा जायेगा.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >