फोटो 16 बांका 17 : इस तरह हो रहा तसर का उत्पादन – 800 की पूंजी में होती है 10 हजार की कमाईप्रतिनिधि, जयपुर ओपी क्षेत्र के दर्जनों गांव में तसर की खेती की जाती है. इस क्षेत्र के आदिवासी व अन्य जाति के किसानों द्वारा इसकी खेती की जाती है. किसान कहते है कि तसर की खेती करने की जानकारी प्रदान संस्था द्वारा मिलती है. खेती करने के लिए विभिन्न प्रकार का सहयोग मिलता है. संस्था द्वारा ही अर्जुन का पौधा लगाया जाता है. किसान के जमीन पर पौधा का पटवन व देख- रेख किसान खुद से करते है. पौधा लगाने के तीन वर्ष बाद से खेती आरंभ हो जाती है. कैसे होती है तसर का उत्पादप्रदान संस्था द्वारा तसर का बीज किसानों को 800 रुपये पैकेट दिया जाता है. उस पैकेट में 5 हजार कीड़े रहते है. उस कीड़े को अर्जुन के वृक्ष में लटका देते है. कीड़े पत्ते खाने लगते है और वो तसर का खेती 45 दिन में पूरी हो जाती है. किसान गोटी को तोड़ कर संस्था को ही दो रुपये के दर से दे देते है. एक पैकेट में 800 रुपये के लागत पर 10 हजार रुपये की कमाई होती है. साल में दो बार इसकी खेती की जाती है. क्षेत्र के ही मुरलीकेन गांव के अभिमन्यु सिंह ने क्षेत्र के लोगों को तसर की खेती करने का सुझाव दिया है. पहले इन्होंने अपने से खेती किया उसके बाद संस्था का स्थानीय सचिव बनकर किसानों को भी तसर का उत्पादन में जागरूक किया. मुरलीकेन, इंद्रावरण, जोरीकुरा, माथासार, मंझिनियां सहित कई गांव में इसकी खेती कर किसान खुशहाल हो रहे है. तसर उत्पादन करने वाले किसान श्री सिंह, युगल मरांडी, दुखी यादव, शिव लाल सोरेन, गंगा किस्कू, सोभन तांती सहित अन्य ने कहा कि तसर का उत्पादन सही तरीके से किया जाय तो कोई भी किसान सालों भर अपनी जिंदगी खुशहाल बना सकता है.
तसर की खेती से किसानों में खुशहाली
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