विभांशु, बांका : शिक्षा का विस्तार भले ही गांव-गांव हो चुका हो. सरकार शिक्षा के लिए लाखों की योजना स्वीकृत करती हो, परंतु आज भी वैसे गांव हैं, जहां शिक्षा के प्रति आज भी गरीबी व संकुचित वातावरण आड़े आ रहा है. ऐसे समय में शिक्षक ब्रजमोहन मंडल शिक्षक की वास्तविक भूमिका निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.
रात के अंधियारे में शिक्षा की रोशनी फैला रहे ब्रजमोहन
विभांशु, बांका : शिक्षा का विस्तार भले ही गांव-गांव हो चुका हो. सरकार शिक्षा के लिए लाखों की योजना स्वीकृत करती हो, परंतु आज भी वैसे गांव हैं, जहां शिक्षा के प्रति आज भी गरीबी व संकुचित वातावरण आड़े आ रहा है. ऐसे समय में शिक्षक ब्रजमोहन मंडल शिक्षक की वास्तविक भूमिका निभाने में कोई […]

सरकारी विद्यालय में कार्यरत ब्रजमोहन न केवल विद्यालय पठन-पाठन को क्रियाशील बनाये हुए हैं, बल्कि रात्रि पाठशाला लगाकर वंचित बच्चों को गुणवत्ता शिक्षा की डगर पर दौड़ाने में लगे हुए हैं. जी हां, शिक्षक ब्रजमोहन मंडल के नेतृत्व जगतपुर वार्ड नंबर 26 स्थिति नैया टोला में प्रतिदिन रात्रि चौपाल में दो दर्जन से अधिक नैया समाज के बच्चों शिक्षा दिया जा रहा है. प्रतिदिन दो से तीन घंटा तक वर्ग चलाया जा रहा है.
इस दौरान जो बच्चे पढ़ने व लिखने में कमजोर हैं, उनकी कमजोरी रात में आयोजित विशेष कक्षा में दूर की जा रही है. अंधियारे में शिक्षा की अलौकिक रौशनी प्रदान करते देख अन्य अभिभावक भी अपने बच्चे को रात्रि वर्ग में भेज रहे हैं. दरअसल, इस वर्ग में आने वाले सभी बच्चे काफी गरीब हैं. स्कूली शिक्षा के बाद अलग से ट्यूशन रखने में सभी असमर्थ हैं. लिहाजा, नि:शुल्क शिक्षा रात्रि वर्ग में प्रदान की जा रही है.
गरीब व शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने का बेहतर प्रयास
रोस्टर के मुताबिक टोलासेवक लेते हैं कक्षा
शिक्षक ब्रजमोहन ने नयी शिक्षा विस्तार नीति को मजबूती से लागू करने के लिए इस अभियान से एक दर्जन टोला सेवकों को जोड़ा है. रात्रि पाठशाला आयोजित करने के लिए सभी टोला सेवकों को रोस्टर के हिसाब से दिन तय कर दिया गया है.
जबकि विशेष रुप से शिक्षक ब्रजमोहन मंडल प्रतदिन वर्ग में उपस्थित होकर अपने अनुभव से शिक्षा दान कर रहे हैं. रात्रि वर्ग में लगनशील टोला सेवक में श्रवण रजक, निरंजन रजक, कपिलदेव रजक, विद्यापति रजक, सुनील रजक, हरेंद्र रजक, जितेंद्र रजक व अमर रजक शामिल हैं.
रात्रि वर्ग के लिए विद्युत आपूर्ति ठप हो जाने की स्थिति में इमरजेंसी की व्यवस्था की गयी है. जबकि डीइओ इस वर्ग से खुश होकर अपने व्यक्तिगत खर्च से एक पंखा दिये हैं. इसके अलावा एलइडी लाइट से लेकर पेयजल तक की व्यवस्था की गयी है. ताकि, बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी न हो. यह प्रयास काफी लाभदायक है.
ब्रजमोहन मोहन मंडल, शिक्षक
सीटी बजाकर स्कूली बच्चों को अलर्ट करते हैं तुलसी दास
बांका . नक्सल प्रभावित क्षेत्र के जंगली इलाके में एक ऐसे भी शिक्षक पहुंचते हैं, जिनकी सीटी सुनकर बच्चे अलर्ट होकर स्कूल की तरफ दौड़ लगा देते हैं. जी हां, शिक्षक का नाम तुलसी दास है. वे वर्तमान में कटोरिया प्रखंड क्षेत्र अंतर्ग प्रोन्नत मध्य विद्यालय कठौन में प्रधानाध्यापक पद पर कार्यरत हैं. वे प्रतिदिन स्कूल समय से पहले पहुंचते हैं.
साथ ही पोषक क्षेत्र में उनकी बाइक जैसे ही पहुंचती है, वे सीटी बजाना शुरू कर देते हैं. शिक्षक की सीटी सुनकर सड़क के दोनों तरफ स्थिति घर के बच्चे स्कूल की ओर चल पड़ते हैं. यानि हाल के दिनों में तुलसी दास की पहचान सीटी वाले शिक्षक के रूप में हो गयी है. शिक्षक तुलसी दास न केवल स्कूल समय से पहले पहुंचते हैं, बल्कि अन्य शिक्षकों को भी यह आदत दे डाली है. अलबत्ता शिक्षक के साथ सभी बच्चे ससमय स्कूल पहुंच जाते हैं.
प्रतिदिन चेतना सत्र में सूरज व चांद की होती है ताजपोशी
प्रधानाध्यापक तुलसी दास के नेतृत्व में संपूर्ण चेतना सत्र का प्रतिदिन आयोजन होता है. सभी नामांकित छात्र-छात्राएं साफ-सुथरा स्कूल परिधान में इसमें भाग लेते हैं. चेतना सत्र की अधिकारिक कार्रवाई पूर्ण होने के बाद ताजपोशी का एक विशेष आयोजन किया जाता है. दरअसल, छात्र व छात्राओं से दो ऐसे छात्र-छात्राओं का चयन किया जाता है जो सबसे साफ-सुथरा व व्यवस्थित ढंग से ड्रेस में विद्यालय पहुंचते हैं. छात्र से एक सूरज व छात्रा से एक चांद की खोज की जाती है.
सूरज व चांद को चेतना सत्र के दौरान अद्भुत आयोजन के बीच ताजपोशी की जाती है. प्रतिदिन ऐसे सूरज व चांदन की खोज होती है. इस प्रयास से अन्य छात्र-छात्राएं भी इस ताजपोशी के लिए प्रेरित होते हैं. विद्यालय की खास बात यह है कि यहां बाल की बाल संसद काफी प्रसिद्धि प्राप्त की है. प्रधानमंत्री से लेकर सभी मंत्री विशेष रुप से सज-धज कर बाल संसद में भाग लेते हैं. अभिभावक के साथ बैठक भी देखने लायक होता है.
सीटी बजाकर बच्चों को स्कूल पहुंचने के संकेत देना व ताजपोशी का कार्यक्रम काफी बेहतर रंग ला रहा है. विद्यालय संचालन में शिक्षक से अधिक बच्चों की भूमिका अधिक है. सभी अनुशासन में भाग लेते हैं. शिक्षक की कमी के बीच उच्च वर्ग के बच्चे भी नीचली कक्षा का क्लास लेते हैं.
तुलसी दास, प्रधानाध्यापक, प्रोन्नत मवि कठौन
आज मैं जो कुछ हूं, गुरु की बदौलत ही हूं : एसडीपीओ
कटोरिया. ‘यह तन विष की बेल री, गुरु अमृत की खान, शीश दिये जों गुरु मिले, तो भी सस्ता जान’. उक्त बातें एडिशनल एसपी सह एसडीपीओ मदन कुमार आनंद ने कही. उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का प्रारंभिक शिक्षक माता-पिता व परिवार होता है.
आज मैं जो कुछ हूं, गुरु की बदौलत ही हूं. चूंकि मैंने अपनी पढ़ाई-लिखाई ग्रामीण परिवेश में की. वहां गुरु की भूमिका हमारे जैसे शिष्य को संवारने में बहुत ही महत्ता है. उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा के बगैर इंसान ना बोली सीख पाता है, न संस्कार और ना संस्कृति का विकास ही हो पाता है.
प्रथम गुरु रूपी पिता ने दिया ज्ञान : बीडीओ
कटोरिया बीडीओ कुमार सौरभ ने कहा कि मेरे प्रथम गुरु सह पिता ने सक्सेस मंत्र देते हुए बताया कि ‘तुम जो पढ़ोगे, अपने लिये पढ़ोगे’. यानी जीवन में तुम्हारा जो सपना व लक्ष्य है, उस अनुरूप तुम्हें पढ़ना होगा. बीडीओ ने कहा कि पढ़ाई के लिये घंटा नहीं, बल्कि क्वालिटी मायने रखता है. अभिभावक को बेवकूफ बनाने वाले बच्चे खुद को बेवकूफ बना रहे होते हैं. इलाहाबाद के एक शिक्षक सूरत चौधरी द्वारा मार्गदर्शन व सही नजरिया रखने का दिया ज्ञान सदा विस्मरणीय रहेगा.
स्कूल व कॉलेज के शिक्षकों ने किया रिचार्ज : बीएओ
कटोरिया के प्रखंड कृषि पदाधिकारी अजीत कुमार शर्मा ने कहा कि स्कूल के शिक्षक हसन साहब एवं कॉलेज के शिक्षक बीबी शर्मा द्वारा रिचार्ज करने से अपने मुकाम को हासिल कर सका. सरकारी नौकरी का लक्ष्य रख कर मेहनत के साथ पढ़ाई की. हर वेकेंसी का फार्म भरता गया. सपना भी पूरा हुआ. प्रतियोगिता की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन परीक्षा का प्रैक्टिस करनी चाहिये. इससे हल करने की स्पीड, जेनरल नॉलेज व खुद का आत्मविश्वास बढ़ेगा.