मौसम की मार से 15465 हेक्टेयर खेतों में नहीं हो पायी है धनरोपनी
बांका : जिले से सटे झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में धनखेती संपन्न हो गयी है. किसानों ने मौसम के अनुरूप खेती कर गोछी घर कर लिया है. परंतु शुरुआती दौर में मौसम की बेरुखी से बांका में धनखेती प्रभावित होने से इंकार नहीं किया जा सकता है. उपर्युक्त समय गुजर जाने के बाद 84 फीसदी […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
बांका : जिले से सटे झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में धनखेती संपन्न हो गयी है. किसानों ने मौसम के अनुरूप खेती कर गोछी घर कर लिया है. परंतु शुरुआती दौर में मौसम की बेरुखी से बांका में धनखेती प्रभावित होने से इंकार नहीं किया जा सकता है. उपर्युक्त समय गुजर जाने के बाद 84 फीसदी यानी 82535 हेक्टेयर में धान का अाच्छादन संपन्न हो पाया है. विभागीय आंकड़े के मुताबिक 15465 एकड़ में धानरोपनी अब भी शेष है. ज्ञात हो कि 98000 हेक्टेयर में धानरोपनी का लक्ष्य निर्धारित है. हालांकि यह रिपोर्ट विभागीय है. धरातल पर तस्वीर कुछ और है. अब भी पहाड़ी क्षेत्रों के किसान मौसम की बेवफाई का दंश झेल रहे हैं
जानकार किसान की मानें तो समय पर महज 50 फीसदी ही धानखेती संभव हो पायी है. शेष 50 प्रतिशत क्षेत्र में लेट खेती हुई है. निश्चित रूप से देर से की गयी खेती के उत्पादन में भारी असर पड़ेगा. मसलन, उत्पादन में गिरावट की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है. दूसरी ओर चिंता की बात यह है कि धानखेती तो हो गयी अब सिंचाई का साधन आगे संभव हो पायेगा कि नहीं यह भी प्रकृति पर ही निर्भर है. कुल मिलाकर खेती राम भरोसे है. वैज्ञानिकों की मानें तो देर से हुई खेती न केवल धान फसल के उत्पादन पर असर करेगा, बल्कि रबी खेती को भी नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं दूसरी ओर विभाग की ओर आकस्मिक फसल की अबतक तैयारी नहीं दिख रही है. लिहाजा, शेष खेती से वंचित किसानों का क्या होगा, इसकी चिंता जरूर संबंधित किसान को रही है
बहियार से गोछी तो घर कर लिया, पर किसानों को सता रही सिंचाई की चिंता, धरातल की हकीकत से अब भी विभाग बेखबर
करीब 85 फीसदी धनखेती हो चुकी है. एक-दो दिन के अंदर अपेक्षित परिणाम प्राप्त हो जायेंगे. धान अाच्छादन पर विभाग की नजर बनी हुई है. डीजल अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन व पेमेंट जारी है.
सुदामा महतो, जिला कृषि पदाधिकारी, बांका
धान का अाच्छादन प्रखंडवार हेक्टेयर में
प्रखंड लक्ष्य अाच्छादन
अमरपुर 10065 7810
बांका 8476 7639
बाराहाट 7946 7946
बेलहर 9535 8601
बौंसी 8476 6738
चांदन 9005 8159
धोरैया 10595 8105
फुल्लीडुमर 5826 3863
कटोरिया 8476 6874
रजौन 9535 7742
शंभूगंज 10065 9059
फुल्लीडुमर, धोरैया अमरपुर में खरीफ की गिरावट
प्रत्येक फसल की खेती में अमरपुर हमेशा अग्रतर भूमिका में रहा है. परंतु इस बार अमरपुर की स्थिति ठीक नहीं है. जानकारी के मुताबिक अमरपुर में 77 फीसदी खेती हुई है. यही दशा धोरैया व फुल्लीडुमर प्रखंड की भी है. धोरैया में जहां 76 वहीं फुल्लीडुमर में महज 66 फीसदी धनरोपनी हो पायी है. जबकि बाराहाट 100 फीसदी खेती के साथ शीर्ष पर पहुंच गया है. ग्राफ में शंभुगंज व बेलहर की स्थिति भी सुधरी हुई दिख रही है. लेकिन, खेती से वंचित इलाके के किसान त्राहिमाम मुद्रा में है. उनके लिए अगर वैकल्पिक व्यवस्था न हो पायी तो कर्ज व बेरोजगारी से नाता साल भर अटूट रह जायेगा. जानकारी के मुताबिक जिन प्रखंडों में खेती नहीं हो पायी है, उसकी प्रमुख वजह कम बारिश ही है.