कृतिका नक्षत्र तक आंधी न मेघ गर्जन के साथ बारिश की संभावना

जेठ महीना चल रहा है. भगवान सूर्य कृतिका नक्षत्र में प्रवेश कर गये है. अब 25 मई को सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने वाले है

औरंगाबाद/कुटुंबा. जेठ महीना चल रहा है. भगवान सूर्य कृतिका नक्षत्र में प्रवेश कर गये है. अब 25 मई को सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने वाले है. ऐसे में बरसात जैसा मौसम का दृश्य दिख रहा है. वर्षा का दौर जारी है. वैसे इस नक्षत्र की बारिश खरीफ फसल के लिए शुभ संकेत नहीं है. पिछले एक सप्ताह यानी 17 मई से मौसम में उतार-चढ़ाव चल रहा है. मौसम वैज्ञानिकों की माने तो ये ग्लोबल वार्मिंग, पर्यावरण प्रदूषण व जलवायु परिवर्तन में अनिश्चिता के दुष्प्रभाव का परिणाम है. इधर, दिन में कभी चिलचिलाती धूप, तो कभी उमस भरी गर्मी पड़ रही है. इसी बीच कभी देखते-देखते आसमान बादलों से ढंक जा रहा है. आंधी तूफान व मेघगर्जन के साथ बारिश होने लग रही है. हालांकि, रात में आसमान साफ रह रहा है. पिछले छह दिनों के बीच जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कहीं हल्की, कहीं मध्यम तो कहीं मूसलाधार बारिश हुई है. कई जगह वज्रपात से भी लोगों की जान गंवानी पड़ी है. प्राचीन परंपरा के अनुसार इस नक्षत्र की बारिश से सांप-बिच्छु आदि विषैले कीड़े मकोड़े के विष में वृद्धि होती है. वहीं, कृतिका नक्षत्र के बरसने से छह नक्षत्र का नुकसान होता है. इस संबंध में मौसम वैज्ञानिक डॉ अनूप कुमार चौबे ने बताया कि 24 मई तक जिले में मेघ गर्जन के साथ बारिश होने की संभावना है. विभिन्न क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चलेगी. इसे लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है. इस दौरान का अधिकतम तापमान 36 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच और न्यूनतम तापमान 24 से 28 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि इस बीच कभी-कभी उमस भरी गर्मी भी रह सकती है.

गर्मा, सब्जी फसल की क्षति

बेमौसम बारिश से गर्मा सब्जी फसल बर्बाद हो रही है. आगात की बुआई की गयी दलहनी मूंग फसल में भी काफी क्षति हुई है. हवा के झोकों के साथ वर्षा के बौछारो से मूंग का परागन झड़ रहा है. वहीं टिड्डो का भयंकर प्रकोप बढ़ा है. जिन पशुपालकों ने अभी तक पशु चारा नहीं संजोया था बारिश होने से उनकी परेशानी बढ़ गयी है. तेज आंधी से आम का फल पेड़ से गिरकर खराब हो जा रहा है. दूसरे तरफ वर्षा से मिट्टी में हल्की नमीं आयी है. किसान वर्ग नर्सरी के लिए खेत को इलेक्ट्रिक मोटर से पटवन करने में जुटे थे उन्हें हद तक कुछ राहत मिली है.

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By Sujit kumar

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