निपुण बिहार से स्कूलों में बढ़ेगी शिक्षा की गुणवत्ता

जिले में निपुण बिहार उत्कर्ष के लिए मास्टर प्रशिक्षकों के कार्यशाला का आयोजन

जिले में निपुण बिहार उत्कर्ष के लिए मास्टर प्रशिक्षकों के कार्यशाला का आयोजन औरंगाबाद शहर. आकांक्षी जिला कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में निपुण बिहार उत्कर्ष के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए मास्टर प्रशिक्षक कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसका संचालन पीरामल फाउंडेशन द्वारा किया गया. जिसका उद्देश्य मूलभूत साक्षरता व संख्यात्मकता लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मास्टर प्रशिक्षकों की क्षमता को सुदृढ़ करना था. पीरामल फाउंडेशन के जिला प्रबंधक शादाब आलम ने गांधी फेलोशिप कार्यक्रम एवं निपुण लक्ष्यों की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए मास्टर प्रशिक्षकों की भूमिका को स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर पर गुणवत्ता आधारित शिक्षण सुनिश्चित करने में मास्टर प्रशिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. कार्यशाला का संचालन मास्टर प्रशिक्षकों द्वारा किया गया, जिसमें मास्टर प्रशिक्षक राजकुमार गुप्ता, कौशल किशोर एवं रमेश कुमार ने प्रमुख नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभायी. सत्रों में एक सफल व आदर्श शिक्षक की भूमिका, उसकी जिम्मेदारियों तथा उन्हें व्यवहार में उतारने के तरीकों पर गहन चर्चा की गयी. रमेश कुमार ने टीआइपीपीएस के प्रमुख संकेतकों पर प्रकाश डाला गया, जो शिक्षकों के शैक्षिक कौशल, सकारात्मक विद्यालय वातावरण एवं बाल-अनुकूल शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने में सहायक हैं. साथ ही निरंतर कक्षा अवलोकन, संरचनात्मक फीडबैक, मेंटोरिंग एवं सहयोगात्मक मार्गदर्शन की आवश्यकता पर बल दिया गया. कार्यशाला में प्रोग्राम लीडर अहमद रजा ने जिले के 170 विद्यालयों के कक्षा तीन के विद्यार्थियों की दक्षताओं से संबंधित आंकड़ों को प्रस्तुत किया गया. इन आंकड़ों का निपुण लक्ष्यों के सापेक्ष विश्लेषण करते हुए भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की गई. राजकुमार गुप्ता एवं कौशल कुमार ने आदर्श कक्षा की परिकल्पना, प्रभावी पाठ योजना, गतिविधि-आधारित शिक्षण तथा छात्र-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों पर विशेष जोर दिया. कक्षा शिक्षण को रोचक बनाने के लिए एफएलएन टीएलएन किट, स्वर-हावभाव, स्थानीय भाषा एवं वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरणों के प्रयोग पर बल दिया गया. समग्र शिक्षा अभियान से आए पदाधिकारियों ने मास्टर प्रशिक्षकों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया. वहीं आपो सर्वेश एवं गंगाधर ने निपुण लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु महत्वपूर्ण सुझाव साझा किये. कार्यशाला का समापन शादाब आलम द्वारा किया गया, जिसमें उन्होंने कार्यशाला के प्रमुख निष्कर्षों को रेखांकित किया. कार्यशाला में रफीगंज, मदनपुर व ओबरा प्रखंड के सभी मास्टर प्रशिक्षक उपस्थित रहे. पीरामल फाउंडेशन से प्रोग्राम लीडर स्पृहा सिंह, अहमद रजा, प्रीति मिश्रा एवं गांधी फेलो की सक्रिय सहभागिता से कार्यशाला सफल रही.

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