सदर अस्पताल : हाय री व्यवस्था, मरीज खुद से चढ़ाता ऑक्सीजन
फ्लोमिटर की बेहतर व्यवस्था नहीं होने से मरीज परेशान, हाथ में फ्लोमिटर टांगकर मरीज को परिजन देते है ऑक्सीजन सेवा
औरंगाबाद ग्रामीण. सदर अस्पताल में ऑक्सीजन सेवा की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई है. अस्पताल के कई वार्डों में ऑक्सीजन बॉक्स तो मौजूद हैं, लेकिन फ्लोमीटर नहीं होने के कारण मरीजों को सही तरीके से ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है. स्थिति इतनी गंभीर है कि कई मरीजों के परिजन खुद हाथ में फ्लोमिटर पकड़कर किसी तरह मरीज को ऑक्सीजन दिलाने को मजबूर हैं. इससे अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों और दावों पर सवाल खड़े हो गये हैं. जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल के कई वार्डों में ऑक्सीजन पाइपलाइन तो जुड़ी हुई है, लेकिन उससे जुड़े फ्लोमीटर या तो लगाये ही नहीं गये हैं या फिर खराब अवस्था में हैं. कुछ वार्डों में फ्लोमीटर लगे भी हैं, तो उनमें लीकेज की समस्या है, जिससे ऑक्सीजन का सही फ्लो मरीज तक नहीं पहुंच पा रहा है. ऐसे में गंभीर मरीजों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है, जिन्हें लगातार और नियंत्रित मात्रा में ऑक्सीजन की जरूरत होती है. बारुण प्रखंड के रिउर गांव निवासी जितेंद्र शर्मा को सांस लेने में समस्या उत्पन्न हुई. जिस वार्ड के बेड पर उन्हें भर्ती किया गया है उसका फ्लोमीटर ही खराब था. परिजन खुद हाथ मे फ्लोमीटर पकड़कर मरीज को सुविधा बहाल कर रहे थे. नर्सों को कहने के बावजूद भी कोई पहल नहीं की गयी. इसी तरह अन्य कई मरीज भी परेशान दिखे. मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद जब डॉक्टर ऑक्सीजन लगाने की सलाह देते हैं, तो वार्ड में फ्लोमीटर नहीं मिलने के कारण अफरातफरी की स्थिति बन जाती है. कई बार परिजन इधर-उधर से फ्लोमिटर की व्यवस्था करते हैं और उसे हाथ में पकड़कर मरीज को ऑक्सीजन देते हैं. इससे न सिर्फ इलाज में परेशानी होती है, बल्कि मरीज की जान को भी खतरा बना रहता है. सूत्रों के मुताबिक करीब पांच महीने पहले सदर अस्पताल में दर्जनों फ्लोमीटर खराब हो गये थे. इन्हें बदलने या मरम्मत कराने की प्रक्रिया शुरू तो हुई, लेकिन अब तक इन्हें दोबारा वार्डों में नहीं लगाया गया. इस कारण अस्पताल में ऑक्सीजन सुविधा का ढांचा अधूरा पड़ा है. हैरानी की बात यह है कि यह स्थिति तब है, जब सदर अस्पताल को मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित किया जा रहा है और लगातार निरीक्षण व सुधार के दावे किए जा रहे हैं. अस्पताल प्रबंधक प्रफुल्ल कांत निराला ने बताया कि जरूरत पड़ने पर फ्लोमीटर लगाकर मरीजों को ऑक्सीजन की सुविधा दी जाती है. किसी भी मरीज को ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी जाती और स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है. हालांकि जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है, जहां परिजन खुद व्यवस्था संभालते दिख रहे हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऑक्सीजन थेरेपी में फ्लोमीटर की भूमिका बेहद अहम होती है. इसके बिना मरीज को न तो सही मात्रा में ऑक्सीजन मिल पाती है और न ही उसकी निगरानी संभव हो पाती है. ऐसे में सदर अस्पताल जैसे बड़े सरकारी संस्थान में इस तरह की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है. स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द सभी वार्डों में पर्याप्त संख्या में नए और दुरुस्त फ्लोमीटर लगाए जाएं, ताकि मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज मिल सके. यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता.
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