Aurangabad News : प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के निर्देशानुसार कॉम्प्लेक्स रिसोर्स सेंटर, अभ्यास मध्य विद्यालय तरार में संकुल स्तरीय उन्मुखीकरण सह प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में कक्षा 4 से 8 तक के विद्यार्थियों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान को सुदृढ़ बनाने तथा टीएआरएल (Teaching at the Right Level) पद्धति के तहत हिंदी एवं गणित विषय के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण दिया गया.
संकुल समन्वयक ने किया कार्यशाला का उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन संकुल समन्वयक मो. ऐनुल हक एवं संचालक पवन कुमार ने संयुक्त रूप से किया. प्रशिक्षण के दौरान हिंदी शिक्षक अलखदेव नारायण शर्मा प्रशिक्षक के रूप में उपस्थित रहे. उन्होंने शिक्षकों को बच्चों की सीखने की क्षमता और वर्तमान शैक्षणिक स्तर के अनुरूप शिक्षण पद्धति अपनाने के बारे में विस्तार से जानकारी दी.
विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक हुए शामिल
कार्यशाला में अभ्यास मध्य विद्यालय तरार के प्रधानाध्यापक सहित चार शिक्षक, उर्दू मध्य विद्यालय तरार के प्रभारी प्रधानाध्यापक मो. फैयाज, मध्य विद्यालय इमामगंज की प्रधानाध्यापिका रेनू लता, प्राथमिक विद्यालय सेवही के शिक्षक सुनील कुमार तथा प्राथमिक विद्यालय मिश्र बिगहा के शिक्षक सुभाष कुमार अपने-अपने विद्यालयों के शिक्षकों के साथ शामिल हुए.
बच्चों के सीखने के स्तर के अनुसार पढ़ाने पर दिया गया जोर
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि बच्चों को केवल उनकी कक्षा या उम्र के आधार पर पढ़ाने के बजाय उनके सीखने के वर्तमान स्तर का आकलन करना अधिक प्रभावी होता है. इसी आधार पर विद्यार्थियों को समूहों में विभाजित कर उनकी आवश्यकता के अनुरूप शिक्षण कराने पर विशेष जोर दिया गया.
गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति की दी जानकारी
प्रशिक्षकों ने बताया कि टीएआरएल पद्धति के माध्यम से बच्चों में पढ़ने, समझने, लिखने तथा गणितीय कौशल को उनकी वर्तमान क्षमता के अनुसार विकसित किया जा सकता है. शिक्षकों को हिंदी एवं गणित में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर की पहचान करने तथा उसी के अनुरूप गतिविधि आधारित शिक्षण कराने के विभिन्न तरीकों से अवगत कराया गया.
विद्यालयों में प्रशिक्षण लागू करने का दिया गया निर्देश
कार्यशाला के दौरान शिक्षकों ने प्रशिक्षण में बताए गए तरीकों को विस्तार से समझा और विद्यालय स्तर पर उन्हें लागू करने की जानकारी प्राप्त की. प्रशिक्षकों ने शिक्षकों से विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति पर नियमित निगरानी रखने तथा कमजोर बच्चों पर विशेष ध्यान देकर उनकी शैक्षणिक क्षमता विकसित करने की अपील की.
