झोपड़ी में पढ़ाई कर औरंगाबाद के सोनू ने हासिल की रेलवे में नौकरी, बने असिस्टेंट लोको पायलट

Aurangabad News : औरंगाबाद के सोनू कुमार ने आर्थिक तंगी के बावजूद मेहनत से इंडियन रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट बनकर गांव का नाम रोशन किया है. जानिए उनकी संघर्ष की कहानी.

Aurangabad News : मदनपुर थाना क्षेत्र के एरकी कला गांव निवासी जयराम मेहता और सुनीता देवी के पुत्र सोनू कुमार का चयन इंडियन रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट के पद पर हुआ है. सोनू का प्रारंभिक चयन बिलासपुर रेलवे बोर्ड में हुआ था, लेकिन बाद में म्यूचुअल ट्रांसफर के माध्यम से उनका स्थानांतरण भुवनेश्वर कर दिया गया है. सोनू के चयन की खबर मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों में खुशी का माहौल है.

पढ़ाई के लिए झोपड़ी का लेना पड़ा था सहारा

ग्रामीणों के अनुसार, सोनू का परिवार काफी आर्थिक तंगी से गुजरता रहा है. सीमित संसाधनों के कारण एक समय सोनू को पढ़ाई के लिए झोपड़ी का सहारा लेना पड़ता था. इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई के प्रति अपनी लगन और मेहनत को कम नहीं होने दिया. आर्थिक परेशानियों के बीच लगातार मेहनत करते हुए सोनू ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट के पद पर चयन हासिल किया.

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सफलता को ग्रामीणों ने संघर्ष और मेहनत का परिणाम बताया

सोनू की उपलब्धि को ग्रामीण उनकी मेहनत, लगन और संघर्ष का परिणाम बता रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सोनू ने जिस तरह अपनी पढ़ाई जारी रखी, वह गांव के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणादायक है. उन्होंने कहा कि सोनू के रेलवे में चयन से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. साथ ही गांव के दूसरे युवाओं को भी मेहनत कर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी.

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बच्चों और युवाओं को पढ़ाई के लिए करते रहे हैं प्रेरित

ग्रामीणों ने बताया कि सोनू स्वयं भी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए युवाओं और बच्चों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करते रहे हैं. उनकी सफलता से गांव के बच्चों और युवाओं में भी उत्साह का माहौल है.

ग्रामीणों ने दी सफलता की बधाई

सोनू के रेलवे में चयन की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी. लोगों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि सोनू ने अपनी मेहनत से न केवल परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे गांव के लिए मिसाल कायम की है.

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By मनीष राज सिंघम

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