Aurangabad News: सोन नदी के जलस्तर में बुधवार को आई कमी के बाद तटीय क्षेत्रों में बसे ग्रामीणों और किसानों ने बड़ी राहत की सांस ली है. हालांकि, नदी में जलप्रवाह की प्रकृति राइजिंग ट्रेंड में होने के कारण स्थानीय प्रशासन पूरी तरह चौकस है. नदी के डूब क्षेत्र और निचले इलाकों में रहने वाले नागरिकों को लगातार सावधानी बरतने और सजग रहने की सलाह दी जा रही है.
इंद्रपुरी बराज के 21 फाटक खुले, नहरों में भी जलापूर्ति जारी
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, बुधवार की सुबह इंद्रपुरी बराज के कुल 69 फाटकों में से 21 गेट खुले रखे गए थे. इस दौरान बराज की जल स्थिति और डिस्चार्ज का विवरण इस प्रकार रहा:
- जलस्तर: बराज के ऊपरी हिस्से (अपस्ट्रीम) का जलस्तर 355 फीट और निचले हिस्से (डाउनस्ट्रीम) का जलस्तर 336 फीट दर्ज किया गया.
- पानी का डिस्चार्ज: अपस्ट्रीम से 90,336 क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज हुआ, जबकि डाउनस्ट्रीम में 80,511 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था.
- नहरों में बहाव: मुख्य नहर प्रणालियों में जलापूर्ति निर्बाध रूप से जारी रही, जिसमें डब्ल्यूएलसी (WLC) में 5,001 क्यूसेक, डब्ल्यूपीएलसी (WPLC) में 1,016 क्यूसेक तथा ईएलसी (ELC) में 3,808 क्यूसेक पानी प्रवाहित किया गया.
जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम बराज के जलस्तर, गेटों के संचालन और बहाव की गति पर 24 घंटे पैनी नजर बनाए हुए है.
अनावश्यक रूप से नदी तट पर न जाएं लोग: सीओ
बारून के अंचलाधिकारी (सीओ) नारायण राय ने बताया कि सोन नदी के उतार-चढ़ाव भरे जलस्तर को ध्यान में रखते हुए पूरा प्रशासनिक तंत्र अलर्ट मोड में है. तटवर्ती गांवों और दियारा क्षेत्र की स्थिति पर राजस्व कर्मियों और चौकीदारों के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जा रही है.
सीओ ने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि "यद्यपि नदी के जलस्तर में पिछले दिनों की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है, फिर भी सुरक्षा के मद्देनजर ग्रामीण अनावश्यक रूप से नदी किनारे, घाटों पर या गहरे पानी की ओर न जाएं." उन्होंने पशुपालकों और किसानों से भी आग्रह किया कि वे पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखें तथा किसी भी संभावित खतरे अथवा जलस्तर में अचानक वृद्धि होने पर तत्काल अंचल कार्यालय व स्थानीय पुलिस को सूचित करें.
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