Aurangabad News : औरंगाबाद. प्रखंड के नौनेर में सोन नदी का पानी बढ़ने से एक दर्जन से अधिक किसानों की सब्जी की फसल बर्बाद हो गयी. अचानक पानी का बहाव तेज होने से खेतों में लगी परवल सहित अन्य सब्जियों की फसल पानी में डूब गयी, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. किसानों ने फसल क्षति का आकलन कराकर नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है.
पानी के तेज बहाव से खेतों में डूबी फसल
जानकारी के अनुसार सोन नदी में अचानक पानी का बहाव तेज हो जाने से नदी के डिहा पर खेती करने वाले एक दर्जन से अधिक किसानों की सब्जी की फसल बर्बाद हो गयी. पानी के तेज बहाव के कारण खेतों में लगी परवल सहित अन्य फसलें प्रभावित हुई हैं. फसल नष्ट होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. ग्रामीण विक्की कुमार ने बताया कि सोन नदी में अचानक पानी बढ़ने के कारण नौनेर गांव के लाल बिहारी चौधरी, प्रभु साहू, विजय चौधरी, बाली चौधरी, सुभाष चौधरी, बसंत चौधरी, डोम चौधरी सहित एक दर्जन से अधिक किसानों की सब्जी की फसल को नुकसान पहुंचा है. किसानों ने नदी के किनारे डिहा पर काफी मेहनत और लागत लगाकर सब्जी की खेती की थी. फसल तैयार होने के समय अचानक पानी आ जाने से उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर गया.
एक बीघा से अधिक परवल की फसल नष्ट
ग्रामीणों के अनुसार लाल बिहारी चौधरी ने एक बीघा से अधिक जमीन में परवल की खेती की थी, जो पानी के कारण पूरी तरह बर्बाद हो गयी. वहीं प्रभु साहू की करीब दो बीघा में लगी परवल की फसल भी नष्ट हो गयी है. विजय चौधरी की एक बीघा से अधिक में लगी परवल की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है. इसके अलावा अन्य किसानों के खेतों में लगी सब्जियों की फसल भी पानी में डूबने से खराब हो गयी है.
फसल बर्बाद होने से लागत डूबने की चिंता
किसानों का कहना है कि सब्जी की खेती में बीज, खाद, दवा, मजदूरी और सिंचाई समेत काफी खर्च किया गया था. फसल तैयार होने के बाद उससे अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन अचानक सोन नदी का पानी बढ़ने से फसल बर्बाद हो गयी. किसानों ने बताया कि एक साथ बड़ी मात्रा में फसल नष्ट होने से उन्हें काफी आर्थिक नुकसान हुआ है. अब दोबारा खेती करने के लिए भी उन्हें अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ेगी.
किसानों ने क्षति का आकलन कर मुआवजे की मांग की
फसल बर्बाद होने के बाद किसानों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है. किसानों ने प्रशासन से खेतों में हुई क्षति का स्थलीय निरीक्षण कराकर वास्तविक नुकसान का आकलन कराने तथा नियमानुसार सहायता एवं मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है. किसानों का कहना है कि यदि समय पर क्षति का आकलन कर सहायता उपलब्ध करायी जाती है, तो उन्हें काफी राहत मिल सकती है.
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राजस्व कर्मचारी करेंगे फसल क्षति की जांच
इस संबंध में अंचलाधिकारी राकेश शर्मा ने बताया कि किसानों की फसल को हुए नुकसान की जांच राजस्व कर्मचारी के माध्यम से करायी जाएगी. राजस्व कर्मचारी स्थल पर जाकर फसल क्षति का जायजा लेंगे तथा जांच प्रतिवेदन तैयार करेंगे. उन्होंने बताया कि जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.
