Aurangabad senior citizens day: दिशा बौद्धिक मंच एवं प्रबुद्ध भारती के संयुक्त तत्वावधान में लखन मोड़ स्थित न्यूटन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के सभागार में अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य समाज और परिवार के निर्माण में वरिष्ठ नागरिकों के योगदान को रेखांकित करते हुए उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना रहा.
वरिष्ठ नागरिकों को बताया समाज की अमूल्य धरोहर
कार्यक्रम की शुरुआत शिक्षाविद डॉ. एसपी सुमन के स्वागत उद्बोधन से हुई. उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज की अमूल्य धरोहर हैं. उनके अनुभव, मार्गदर्शन और जीवन मूल्यों से नई पीढ़ी को दिशा मिलती है. उन्होंने समाज निर्माण में वरिष्ठ नागरिकों के योगदान को रेखांकित करते हुए उनके सम्मान को आवश्यक बताया. समारोह में आदर और उल्लास के प्रतीक के रूप में केक भी काटा गया. इस दौरान वरिष्ठ नागरिकों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं.
सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकारों ने बांधा समां
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया. संगीत शिक्षक अंजन सिंह, रवि कुमार एवं मोंटी केसरी ने अपनी प्रस्तुतियों से उपस्थित लोगों का मनोरंजन किया. अभिनेता विकास कुमार ने कहा कि जिस आंगन में बुजुर्गों का आदर और सम्मान होता है, वह घर साक्षात स्वर्ग का रूप ले लेता है. उन्होंने नई पीढ़ी से वरिष्ठजनों के अनुभवों से सीख लेने की अपील की.
कई वरिष्ठ नागरिक रहे मौजूद
समारोह में वरिष्ठ रंगकर्मी ब्रजेश कुमार, सेवानिवृत्त अनुमंडल कृषि पदाधिकारी द्वारिका प्रसाद उर्फ गुरु जी, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक सुरेंद्र कुमार उर्फ उमा बाबू, डॉ. गौरी शंकर सिंह, महेंद्र गुप्ता, राधा रमन पुरी, हाफिज मोहम्मद खुर्शीद आलम एवं मो. खुर्शीद खान सहित कई वरिष्ठ नागरिक मौजूद रहे.
इसके अलावा सेवानिवृत्त अनुमंडल कृषि पदाधिकारी मो. असलम अंसारी, सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक राजेंद्र चौधरी एवं शिव शंकर प्रसाद, अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक गोपाल गुप्ता, शत्रुघन कुमार, गुप्तेश्वर प्रसाद, राजेश गुप्ता, संजय गुप्ता, आफताब आलम, संजय कुमार, विद्यानंद एवं दीपेश कुमार सहित अन्य उपस्थित थे.
द्वारिका प्रसाद ने किया संचालन
कार्यक्रम का संचालन द्वारिका प्रसाद ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ रंगकर्मी ब्रजेश कुमार ने किया. समारोह में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान और उनके अनुभवों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया गया.
