कुटुंबा में पांच दिवसीय झूलनोत्सव का भक्तिमय समापन, रामजानकी मंदिर में देर रात तक गूंजते रहे भजन और जयकारे

कुटुंबा के रसलपुर ठाकुरबाड़ी में पांच दिवसीय झूलनोत्सव का समापन हुआ। रामभक्ति के गीतों और कीर्तन से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा।

कुटुंबा थाना क्षेत्र के रसलपुर गांव स्थित रामजानकी मंदिर ठाकुरबाड़ी में सावन पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय झूलनोत्सव शुक्रवार की देर रात भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ. पांच दिनों तक ठाकुरबाड़ी परिसर में भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा. आकर्षक तरीके से सजाए गए झूले पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की प्रतिमाओं को विराजमान कराया गया. श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद भगवान को झूला झुलाया और सुख-समृद्धि की कामना की.

उत्सव के दौरान प्रतिदिन शाम से लेकर देर रात तक मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, आरती और झूलन गीतों की प्रस्तुतियां होती रहीं. आसपास के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं की मौजूदगी से ठाकुरबाड़ी परिसर में काफी चहल-पहल रही.

भक्ति गीतों पर देर रात तक झूमते रहे श्रद्धालु

झूलनोत्सव के दौरान चर्चित व्यास आमोद सिंह ने भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर रामायण के अलग-अलग प्रसंगों पर आधारित भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी. उनके गीतों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया. भक्ति गीतों के दौरान श्रद्धालु देर रात तक झूमते नजर आए.

सभा कक्ष में हरी कीर्तन करते श्रद्धालु

मंदिर परिसर में लगातार जय श्रीराम के जयकारे और भजन-कीर्तन की गूंज सुनाई देती रही. पांच दिनों तक चले इस आयोजन में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया.

कई गांवों से पहुंचे श्रद्धालु

रसलपुर के अलावा लभरी, आरती, परसावां समेत आसपास के कई गांवों से श्रद्धालु झूलनोत्सव में शामिल होने पहुंचे. बच्चों में भी आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखा गया. श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के दर्शन किए और पूजा-अर्चना के बाद झूला झुलाकर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की.

आयोजन के दौरान देर रात तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही. स्थानीय लोगों के अनुसार झूलनोत्सव को लेकर हर वर्ष ग्रामीणों में खासा उत्साह रहता है और आसपास के गांवों के लोग भी इसमें शामिल होने पहुंचते हैं.

अंतिम रात झूले पर झुलाया जा रहा है भगवान की प्रतिमा

मंदिर के पुजारी चंद्रशेखर मिश्रा ने बताया कि सावन महीने के अंतिम पांच दिनों में झूलनोत्सव आयोजित करने की परंपरा वर्षों पुरानी है. इसी धार्मिक परंपरा के तहत इस वर्ष भी पांच दिवसीय आयोजन किया गया. सावन पूर्णिमा की रात विधिवत पूजा-अर्चना और आरती के साथ उत्सव का समापन हुआ.

110 वर्ष से अधिक पुरानी है ठाकुरबाड़ी

ग्रामीणों के अनुसार रसलपुर गांव की यह ठाकुरबाड़ी करीब 110 वर्ष से अधिक पुरानी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस धार्मिक स्थल का संबंध अयोध्या धाम से भी रहा है. इसी धार्मिक परंपरा और आस्था के कारण यहां हर वर्ष सावन के अंतिम दिनों में झूलनोत्सव का आयोजन किया जाता है.

ग्रामीणों का कहना है कि झूलनोत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांव और आसपास के लोगों को एक साथ जोड़ने वाला पारंपरिक उत्सव भी है. पांच दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर धार्मिक वातावरण का हिस्सा बनते हैं.

ग्रामीणों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

झूलनोत्सव को सफल बनाने में मंदिर प्रबंधन, आयोजन समिति के सदस्यों और ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. आयोजन में लवकांता सिंहा, अभिषेक शरण, वार्ड सदस्य राहुल सिंह, प्रोफेसर नारेंद्र पांडेय, रविंद्र विश्वकर्मा, विरान विश्वकर्मा, जवाहर यादव, अलग विश्वकर्मा समेत कई ग्रामीणों का योगदान रहा.

सावन पूर्णिमा की रात पूजा-अर्चना और आरती के साथ पांच दिवसीय आयोजन का समापन होने के बाद भी मंदिर परिसर में भक्ति का माहौल बना रहा. स्थानीय लोगों ने धार्मिक परंपरा को आगे भी इसी श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी रखने की बात कही.


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By अंबुज कुमार

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