औरंगाबाद: दाउदनगर में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग कार्यशाला का आयोजन, गणित व विज्ञान शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण

औरंगाबाद के दाउदनगर में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग (PBL) पर आधारित एक महत्वपूर्ण उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच और व्यावहारिक ज्ञान विकसित करना है. प्रशिक्षण में गणित व विज्ञान के शिक्षकों को नई शैक्षणिक तकनीकों से अवगत कराया गया.

Aurangabad News: औरंगाबाद जिले के दाउदनगर प्रखंड अंतर्गत अशोक इंटर विद्यालय में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग (पीबीएल) कार्यक्रम के तहत प्रखंड स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, समस्या समाधान की क्षमता और व्यावहारिक ज्ञान विकसित करना है. कार्यशाला का विधिवत उद्घाटन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सह कल्याण पदाधिकारी विकास कुमार, प्रभारी प्रधानाध्यापक जयशंकर प्रसाद, रामाकांत सिंह और प्रखंड लेखापाल अमरेश कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.

व्यावहारिक ज्ञान पर विशेष जोर

औरंगाबाद के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि नई शिक्षा व्यवस्था में प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखता है. यह अनूठी पद्धति बच्चों को वास्तविक जीवन की व्यावहारिक समस्याओं को गहराई से समझने और उनका तार्किक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करती है. इस कार्यशाला में प्रखंड के सभी मध्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के साथ-साथ गणित एवं विज्ञान विषय के शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया.

कक्षा छह से आठ पर फोकस

औरंगाबाद की इस उन्मुखीकरण कार्यशाला में मुख्य रूप से कक्षा छह से आठवीं तक की गणित एवं विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों को आधार बनाया गया. मास्टर ट्रेनर्स द्वारा शिक्षकों को प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग की अवधारणा, इसके प्रभावी जमीनी क्रियान्वयन, परियोजनाओं के सही चयन, पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया और बच्चों में रचनात्मक सीख विकसित करने के तरीकों की विस्तार से तकनीकी जानकारी दी गई. सत्र के अंत में गुणवत्ता मूल्यांकन के लिए सभी प्रतिभागियों से ऑनलाइन फीडबैक भी लिया गया.

सीखने की प्रक्रिया होगी प्रभावी

औरंगाबाद के दाउदनगर में आयोजित इस विशेष कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में पीबीएल को प्रभावी रूप से लागू करना और शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता को बढ़ाना है. इससे बच्चों में नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, टीम वर्क और व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ावा मिलेगा. आयोजकों ने पुरजोर उम्मीद जताई है कि इस व्यापक प्रशिक्षण से सरकारी विद्यालयों में पठन-पाठन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आएगा और बच्चों के सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी.


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By Om Prakash

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