बतरे नदी में खुलेआम डाला जा रहा कूड़ा, दुर्गंध से परेशान लोग, अस्तित्व पर मंडराया संकट

Aurangabad News : औरंगाबाद की बतरे नदी में फेंके जा रहे कचरे से दुर्गंध और महामारी का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन की मांग की है।

Aurangabad News : अंबा प्रखंड मुख्यालय स्थित बतरे नदी में खुलेआम कूड़ा-कचरा फेंके जाने से नदी का अस्तित्व संकट में पड़ गया है. बाजार और आसपास के मोहल्लों से निकलने वाला ठोस अपशिष्ट, मछली बाजार का सड़ा-गला अवशेष, मुर्गों के पंख तथा अन्य गंदगी लगातार नदी में डाली जा रही है. इससे नदी का बड़ा हिस्सा कचरे से पट गया है और आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है.

नाक पर हाथ रखकर पुल पार करने को मजबूर राहगीर

बतरे नदी पर बने पुल से होकर प्रतिदिन कुटुंबा, नवीनगर और औरंगाबाद जिला मुख्यालय की ओर बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं. इसी मार्ग से स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों के छात्र-छात्राएं भी गुजरते हैं. नदी से उठ रही तेज दुर्गंध के कारण राहगीरों को नाक पर हाथ रखकर पुल पार करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कचरा निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं की गई तो संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है.

पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर बढ़ रहा खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि नदियां पर्यावरण संतुलन, जल संरक्षण और जैव विविधता की आधारशिला हैं. वैदिक काल से नदियों का धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व रहा है, लेकिन शहरीकरण और अव्यवस्थित कचरा प्रबंधन के कारण जल स्रोत तेजी से प्रदूषित हो रहे हैं. बतरे नदी की वर्तमान स्थिति भी इसी लापरवाही का परिणाम मानी जा रही है.

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प्रशासन से की गई ठोस कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिक अजीत कुमार, डॉ. अर्जुन वर्मा, डॉ. प्रकाश वर्मा, डॉ. ओमप्रकाश, शिक्षक नीरज कुमार तथा नागेंद्र कुमार नंद ने प्रखंड प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकृष्ट कराया है. उन्होंने नदी में कचरा फेंकने पर तत्काल रोक लगाने, नियमित सफाई अभियान चलाने, ठोस कचरा प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा नदी संरक्षण के लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों की संयुक्त पहल की मांग की है. उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो पर्यावरण के साथ-साथ जनस्वास्थ्य पर भी गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है.

मौसम वैज्ञानिक ने बताया नदी संरक्षण का महत्व

मौसम वैज्ञानिक डॉ. अनूप कुमार चौबे ने कहा कि नदियां प्रकृति की चिर सहचरी रही हैं और भारतीय संस्कृति में सदियों से प्रकृति की पूजा होती आई है. उन्होंने कहा कि मनुष्य ही नहीं, बल्कि सभी जीव-जंतुओं का जीवन प्रकृति पर निर्भर है. प्रकृति परिवर्तन का नियम शाश्वत सत्य है, लेकिन यदि धरती से नदियों का अस्तित्व समाप्त हो गया तो मानव जीवन भी संकट में पड़ जाएगा. उन्होंने नदियों के संरक्षण के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल दिया.

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By Ambuj kumar

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