नॉर्मल या सिजेरियन डिलीवरी...कौन ज्यादा दर्दनाक? जानिए मातृत्व की सच्चाई, हर मां का संघर्ष बराबर

नॉर्मल डिलीवरी और सिजेरियन को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करें। जानें कि प्रसव का तरीका चाहे जो हो, मां का संघर्ष और त्याग हमेशा समान होता है।

औरंगाबाद ग्रामीण. समाज में आज भी नॉर्मल डिलीवरी और सिजेरियन (सी-सेक्शन) को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं प्रचलित हैं. अक्सर नॉर्मल डिलीवरी को ही "सच्ची डिलीवरी" माना जाता है, जबकि सिजेरियन से बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं के संघर्ष को कम करके आंका जाता है. वहीं नॉर्मल डिलीवरी कराने वाली महिलाओं से कहा जाता है कि वे ऑपरेशन से बच गईं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी तुलना पूरी तरह गलत है. बच्चे को जन्म देने का हर तरीका अपने साथ अलग-अलग तरह की पीड़ा, चुनौतियां और जोखिम लेकर आता है. इसलिए किसी भी मां के प्रसव के तरीके के आधार पर उसका मूल्यांकन नहीं किया जाना चाहिए.

घंटों की प्रसव पीड़ा के बाद होती है नॉर्मल डिलीवरी

नॉर्मल डिलीवरी, जिसे वजाइनल बर्थ कहा जाता है, प्राकृतिक प्रक्रिया जरूर है, लेकिन आसान बिल्कुल नहीं होती. कई महिलाओं को 8 से 20 घंटे या उससे अधिक समय तक लेबर पेन सहना पड़ता है. प्रसव पीड़ा धीरे-धीरे बढ़ती है और कई बार असहनीय हो जाती है. कुछ मामलों में सुरक्षित प्रसव के लिए चिकित्सक एपिसियोटॉमी यानी योनि मार्ग के पास छोटा चीरा लगाते हैं. इसके बाद लगे टांकों के कारण कई दिनों तक बैठने, चलने, करवट बदलने और सामान्य गतिविधियों में भी दर्द बना रहता है. इसके बावजूद अधिकांश माताएं नवजात की देखभाल में जुट जाती हैं.

सिजेरियन कोई आसान विकल्प नहीं, यह बड़ी सर्जरी है

सी-सेक्शन को कई लोग आसान विकल्प मान लेते हैं, जबकि यह एक बड़ी शल्य प्रक्रिया है. जब मां या शिशु की सुरक्षा के लिए नॉर्मल डिलीवरी संभव नहीं होती, तभी डॉक्टर सिजेरियन का निर्णय लेते हैं. ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया के कारण दर्द महसूस नहीं होता, लेकिन उसका असर खत्म होने के बाद महिला को पेट की कई परतों पर लगे चीरे और टांकों के कारण लंबे समय तक तेज दर्द सहना पड़ता है. उठने-बैठने, चलने, खांसने, छींकने और करवट लेने तक में कठिनाई होती है. पूरी तरह स्वस्थ होने में कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है.

हर प्रसव में मां का शरीर और मन कठिन परीक्षा से गुजरता है

प्रसव केवल शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी बेहद चुनौतीपूर्ण समय होता है. गर्भावस्था के नौ महीने पूरे करने के बाद मां प्रसव का दर्द सहती है और फिर नवजात की जिम्मेदारियां निभाती है. नींद की कमी, हार्मोनल बदलाव, कमजोरी और मानसिक तनाव के बावजूद वह अपने बच्चे की देखभाल को प्राथमिकता देती है. इसलिए यह कहना कि किसी एक प्रसव में दर्द ज्यादा या कम होता है, सही नहीं है. दोनों परिस्थितियों में मां समान सम्मान की हकदार होती है.

मां और बच्चे की सुरक्षा सबसे अहम: डॉ. कंचन कुमारी

वरिष्ठ महिला चिकित्सक डॉ. कंचन कुमारी कहती हैं कि समाज में नॉर्मल और सिजेरियन डिलीवरी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना जरूरी है. हर गर्भवती महिला की शारीरिक स्थिति अलग होती है और डॉक्टर हमेशा मां व शिशु की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ही प्रसव का तरीका तय करते हैं. उन्होंने कहा कि नॉर्मल डिलीवरी में प्रसव पीड़ा अधिक होती है, जबकि सिजेरियन के बाद ऑपरेशन से उबरने में अधिक समय लगता है. दोनों ही परिस्थितियों में महिला को परिवार के सहयोग, पौष्टिक भोजन, पर्याप्त आराम और मानसिक समर्थन की आवश्यकता होती है.

प्रसव के बाद परिवार का सहयोग सबसे जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसव के बाद महिलाओं को सबसे अधिक जरूरत परिवार के भावनात्मक सहयोग की होती है. "ऑपरेशन से हुआ है", "दर्द नहीं सहना पड़ा" या "ऑपरेशन से बच गई" जैसी टिप्पणियां महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती हैं. प्रसव के बाद मां को पौष्टिक आहार, पर्याप्त आराम, समय पर दवा और परिवार का सहयोग मिलना चाहिए. यदि अत्यधिक दर्द, बुखार, अधिक रक्तस्राव या मानसिक तनाव के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए.

मातृत्व का सम्मान करें, तुलना नहीं

एक नई जिंदगी को जन्म देना किसी चमत्कार से कम नहीं है. चाहे प्रसव नॉर्मल डिलीवरी से हो या सिजेरियन से, दोनों ही परिस्थितियों में मां अपने शरीर, मन और भावनाओं की कठिन परीक्षा से गुजरती है. समाज को यह समझना होगा कि प्रसव का तरीका नहीं, बल्कि मां का साहस, त्याग और धैर्य सबसे बड़ा होता है.

प्रभात खबर की अपील

हर मां सम्मान की हकदार है. नॉर्मल डिलीवरी और सिजेरियन की तुलना करने के बजाय मातृत्व के संघर्ष को समझें, महिलाओं का मनोबल बढ़ाएं और प्रसव के बाद उन्हें भरपूर सहयोग दें. स्वस्थ मां ही स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और बेहतर भविष्य की मजबूत आधारशिला है.


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By Manish raj singham

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