Aurangabad News : औरंगाबाद नगर सरकार भले ही शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के दावे कर रही हो, लेकिन मदनपुर प्रखंड की दक्षिणी उमंगा पंचायत स्थित वकीलगंज प्राथमिक विद्यालय की स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है. वर्ष 2009 में विद्यालय भवन बनने के बावजूद आज तक वहां पहुंचने के लिए समुचित रास्ता नहीं बन सका है. विद्यालय तक पहुंचने के लिए 141 बच्चों, पांच शिक्षकों और चार शिक्षा सेवकों को खेतों के बीच कीचड़ भरी पगडंडी से गुजरना पड़ता है.
बरसात में स्कूल पहुंचना बन जाता है चुनौती
बारिश के मौसम में विद्यालय तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाता है. छोटे-छोटे बच्चे अक्सर फिसलकर गिर जाते हैं, जबकि शिक्षक भी मुख्य सड़क पर बाइक खड़ी कर पैदल विद्यालय पहुंचते हैं। कई बार शिक्षक भी फिसलकर घायल हो चुके हैं.
पांच गांवों के बच्चे करते हैं पढ़ाई
विद्यालय में वकीलगंज, लालटेनगंज, भगवानपुर, राजकुमार डेरा और रामराज्य बिगहा गांवों के बच्चे पढ़ने आते हैं। कभी नक्सल प्रभावित रहे इस इलाके में अब शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव बच्चों की पढ़ाई में बाधा बन रहा है.
ग्रामीणों में नाराजगी, प्रशासन से लगाई गुहार
ग्रामीणों का कहना है कि जब विद्यालय तक पहुंचने का रास्ता ही नहीं था, तो भवन निर्माण की स्वीकृति कैसे मिली. उन्होंने कई बार प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग की, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हुई. ग्रामीणों ने जल्द पक्का रास्ता बनवाने की मांग की है.
प्राचार्य बोले—सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को
विद्यालय के प्राचार्य मोहम्मद परवेज ने बताया कि बरसात में विद्यालय पहुंचना बेहद कठिन हो जाता है। शिक्षक पैदल विद्यालय पहुंचते हैं और सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों को उठानी पड़ती है.
निर्माण प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
जानकारी के अनुसार किसी भी सरकारी भवन के निर्माण से पहले संबंधित जमीन के लिए अंचल कार्यालय से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लेना अनिवार्य होता है. ऐसे में विद्यालय तक रास्ता नहीं होने के बावजूद भवन निर्माण की स्वीकृति मिलने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द पक्का रास्ता बनवाकर बच्चों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है.
