राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी शुरू, हर थाना से 20 सुलह योग्य मामले चिन्हि्त करने का निर्देश

औरंगाबाद में राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर बैठक आयोजित। सभी थाना प्रभारियों को सुलह योग्य मामलों की पहचान करने और उनके त्वरित निपटारे के निर्देश दिए गए।

Aurangabad News : आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जिले के सभी थाना प्रभारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती आनंदिता सिंह ने की. बैठक में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) लाल बिहारी पासवान, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव तान्या पटेल समेत जिले के सभी थाना प्रभारी मौजूद रहे. बैठक में राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए थाना स्तर पर सुलह योग्य मामलों की पहचान, पक्षकारों से संपर्क और नोटिसों के त्वरित तामिले पर चर्चा की गई.

थाना स्तर से कम से कम 20 मामलों को भेजने का निर्देश

प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश आनंदिता सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत त्वरित, सुलभ और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है. इसकी सफलता में पुलिस पदाधिकारियों की भूमिका अहम है. उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि अपने-अपने थाना क्षेत्रों से कम से कम 20 सुलह योग्य मामलों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए संबंधित न्यायालय को भेजना सुनिश्चित करें. साथ ही पक्षकारों से व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हें लोक अदालत के फायदे की जानकारी देने और आपसी सहमति से मामलों के समाधान का प्रयास करने को कहा.

नोटिस तामिला में लापरवाही नहीं बरतने की हिदायत

बैठक में न्यायालय से निर्गत नोटिसों का समय पर तामिला सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया, ताकि कोई भी पक्षकार सूचना के अभाव में लोक अदालत से वंचित नहीं रहे. सीजेएम लाल बिहारी पासवान ने कहा कि आपसी समझौते से विवादों का समाधान होने पर न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम होता है. इससे समय और धन दोनों की बचत होती है तथा समाज में भाईचारा और सौहार्द मजबूत होता है.

मध्यस्थता के माध्यम से विवादों के समाधान पर जोर

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव तान्या पटेल ने कहा कि प्रत्येक थाना अपने क्षेत्र के सुलह योग्य मामलों की सूची तैयार कर पक्षकारों से लगातार संपर्क बनाए रखे. जिन मामलों में थाना स्तर पर समझौता संभव नहीं हो, उन्हें बिना विलंब मध्यस्थता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजा जाए, ताकि प्रशिक्षित मध्यस्थों की सहायता से विवादों का समाधान कराया जा सके. बैठक में न्यायालय, थाना और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने, प्री-लिटिगेशन मामलों को लोक अदालत के माध्यम से निपटाने और अधिकाधिक लोगों को इसका लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया.



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By Sudhir kumar singh

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