दाउदनगर नगर पर्षद में कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़े मामले की सुनवाई पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव के समक्ष जारी है. अब तक मामले में चार चरणों की सुनवाई पूरी हो चुकी है, जबकि अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की गई है. शिकायतकर्ता वार्ड पार्षदों को उम्मीद है कि इस दिन मामले में कोई महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है.
वार्ड पार्षदों ने लगाए वित्तीय गड़बड़ी समेत कई गंभीर आरोप
जानकारी के अनुसार, वार्ड संख्या 11 के पार्षद संजय प्रसाद और वार्ड संख्या 24 के पार्षद राधारमण पुरी ने नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी पर वित्तीय अनियमितता, योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. इस संबंध में उन्होंने मगध प्रमंडल के आयुक्त समेत संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी थी.
शिकायत के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच टीम गठित की गई थी. जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले को नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजा गया था.
जांच रिपोर्ट में 13 योजनाओं की हुई थी जांच
एसडीओ की बिंदुवार जांच रिपोर्ट के अनुसार, कुल 13 योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया गया था. इनमें चार योजनाएं पूर्ण पाई गईं, जबकि नौ योजनाओं पर कार्य शुरू नहीं होने की बात सामने आई थी. जांच के दौरान सिर्फ एक योजना की मापी पुस्तिका उपलब्ध कराई गई थी.
रिपोर्ट में समय पर मापी पुस्तिका उपलब्ध नहीं कराने को लेकर योजनाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए थे. वहीं कार्यपालक पदाधिकारी से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था.
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, प्रधान सचिव को दिया था आदेश
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि विभागीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्हें पटना हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी. दोनों वार्ड पार्षदों ने वाद संख्या 15752/2025 दायर कर मुख्य पार्षद और कार्यपालक पदाधिकारी पर मिलीभगत कर अनियमितता करने का आरोप लगाया था.
बताया जाता है कि 31 मार्च 2026 को पटना हाईकोर्ट ने नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को सभी पक्षों की सुनवाई कर आठ सप्ताह के भीतर उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया था.
25 बिंदुओं पर लगाए गए हैं आरोप
सूत्रों के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने कार्यपालक पदाधिकारी के खिलाफ 25 बिंदुओं पर आरोप लगाए हैं. इनमें बोर्ड की कार्यवाही में कथित मनमानी, बिना स्वीकृति योजनाओं का संचालन, निविदा प्रक्रिया में अनियमितता, सफाई एजेंसियों के एकरारनामे, नाला उड़ाही, स्ट्रीट लाइट, जेम पोर्टल से खरीद, नल-जल योजना, वाहन और उपकरण खरीद समेत संविदा कर्मियों की नियुक्ति में नियमों के उल्लंघन जैसे मामले शामिल हैं.
इन सभी बिंदुओं की जांच चार सदस्यीय टीम द्वारा किए जाने और कार्यपालक पदाधिकारी से स्पष्टीकरण लेने की बात सामने आई है.
शिकायतकर्ताओं ने निष्पक्ष कार्रवाई की जताई उम्मीद
शिकायतकर्ता वार्ड पार्षद संजय प्रसाद ने कहा कि मुख्य पार्षद और कार्यपालक पदाधिकारी की मिलीभगत से नगर पर्षद में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नगर विकास विभाग निष्पक्ष कार्रवाई करेगा.
वहीं वार्ड पार्षद राधारमण पुरी ने आरोप लगाया कि नाला उड़ाही और विभिन्न सामग्रियों की खरीद में भी अनियमितता हुई है. उन्होंने कहा कि जनता के हितों को देखते हुए ऐसे मामलों को उठाना जरूरी है.
मुख्य पार्षद ने आरोपों को बताया निराधार
नगर पर्षद की मुख्य पार्षद अंजलि कुमारी ने सभी आरोपों को निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि तत्कालीन एसडीओ के नेतृत्व में हुई जांच में उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया.
उन्होंने प्रधान सचिव से पूरे मामले की निष्पक्ष और दोबारा जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि नगर पर्षद की सभी योजनाएं बोर्ड की स्वीकृति के बाद ही लागू की जाती हैं और उनका संचालन तकनीकी एवं प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में होता है.
कार्यपालक पदाधिकारी ने कहा, दोबारा जांच में नहीं मिली गड़बड़ी
कार्यपालक पदाधिकारी ऋषिकेश अवस्थी ने कहा कि पूर्व की जांच रिपोर्ट में कुछ स्थानों पर वित्तीय अनियमितता का उल्लेख किया गया था, लेकिन बाद में हुई जांच में किसी तरह की अनियमितता नहीं पाई गई.
अब 21 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर नगर पर्षद के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और स्थानीय लोगों की नजरें टिकी हुई हैं. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विभाग के अंतिम फैसले का इंतजार किया जा रहा है.
