Aurangabad News: औरंगाबाद जिले में मानसून की सुस्ती के बीच किसान एमटीयू-7029 (स्वर्णा) धान की रोपाई को लेकर काफी चिंतित हैं. वर्तमान में 90 प्रतिशत से अधिक खेतों में अभी फसल नहीं लग सकी है. कृषि विशेषज्ञों और मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि इस किस्म की रोपाई में अधिक देरी होती है, तो उत्पादन पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
कब तक रोपाई करना है सबसे उपयुक्त?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, एमटीयू-7029 लंबी अवधि की एक बेहद लोकप्रिय किस्म है, जो किसानों को सर्वाधिक उत्पादन देती है.
- रोहण नक्षत्र में बिचड़ा (नर्सरी) डालने वाले किसान: जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक रोपाई पूरी कर लें.
- आदरा नक्षत्र में बिचड़ा डालने वाले किसान: अधिकतम 20 से 30 जुलाई तक रोपाई कर लेना सबसे उपयुक्त माना जाता है.
देर से रोपाई करने पर नुकसान
जानकारों का कहना है कि यदि बिचड़ा तैयार होने के 35 दिनों के बाद रोपाई की जाती है, तो पौधों को वानस्पतिक वृद्धि (Vegetative Growth) के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता.
- पौधों में कल्ले (टिलर्स) कम निकलते हैं.
- प्रति पौधा बालियों की संख्या और आकार छोटा रह जाता है.
- बालियों में दानों का भराव सही तरीके से नहीं होता, जिससे कुल पैदावार में भारी गिरावट आती है.
मौसम वैज्ञानिक की सलाह: बारिश होते ही करें रोपाई
मौसम वैज्ञानिक डॉ. अनूप कुमार चौबे ने किसानों को सलाह दी है कि पर्याप्त वर्षा होते ही 25 से 30 दिन की स्वस्थ नर्सरी के पौधों की रोपाई तुरंत कर देनी चाहिए. उन्होंने खेत में सही जल प्रबंधन, संतुलित उर्वरक (खाद) का प्रयोग और समय पर खरपतवार नियंत्रण की आवश्यकता पर बल दिया.
वैकल्पिक फसलों पर विचार करें किसान
मानसून में हो रही देरी को देखते हुए विशेषज्ञों ने किसानों को सुझाव दिया है कि यदि रोपाई में अत्यधिक विलंब होता है, तो वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कम अवधि (Short Duration) वाली धान की किस्मों का चयन करें. इसके अलावा, जिन क्षेत्रों में सिंचाई के पानी की अत्यधिक किल्लत है, वहां के किसान धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों की खेती पर भी विचार कर सकते हैं ताकि संभावित आर्थिक नुकसान से बचा जा सके.
