औरंगाबाद के ओबरा प्रखंड के महुआंव पंचायत भवन परिसर में सोमवार की देर शाम अखिल भारतीय किसान महासभा के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों को लेकर एक बैठक आयोजित की गई.
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में काराकाट लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजाराम सिंह शामिल हुए. सम्मेलन की अध्यक्षता किसान महासभा के जिलाध्यक्ष सत्येंद्र प्रसाद व मंच संचालन सामाजिक कार्यकर्ता महेश्वर सिंह ने किया. इस दौरान आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.
सांसद का किया गया नागरिक अभिनंदन
कार्यक्रम की शुरुआत में कार्यकर्ताओं ने सांसद राजाराम सिंह को अंगवस्त्र व गुलदस्ता भेंटकर सम्मानित किया. इसके बाद जिलाध्यक्ष सह पर्यवेक्षक सत्येंद्र प्रसाद की देखरेख में अखिल भारतीय किसान महासभा की नौ सदस्यीय ओबरा प्रखंड कमेटी का गठन किया गया.
सर्वसम्मति से देवशरण सिंह को प्रखंड अध्यक्ष और राजकिशोर सिंह को सचिव चुना गया. वहीं महेश्वर सिंह, गनौरी सिंह, उपेंद्र राम, सरोज वर्मा, नंदकिशोर सिंह, अर्जुन विश्वकर्मा और जनार्दन यादव को कमेटी का सदस्य बनाया गया.
खाद-बीज के उचित मूल्य का संकल्प
नवनियुक्त पदाधिकारियों ने संकल्प लिया कि वे किसानों व गरीबों के हक के लिए निरंतर संघर्ष करेंगे. वक्ताओं ने किसानों को उचित मूल्य पर उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की.
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किसानों की समस्याओं को लेकर लापरवाही बरती गई, तो जोरदार धरना-प्रदर्शन किया जाएगा. महासभा के जिला सचिव मुनारिक राम ने कहा कि नई प्रखंड कमेटी के गठन से संगठन को निचले स्तर तक मजबूती मिलेगी.
केंद्र सरकार पर किसान विरोधी नीतियों और कॉरपोरेट परस्ती का आरोप
मुख्य अतिथि सांसद राजाराम सिंह ने केंद्र सरकार पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया.
Also Read : औरंगाबाद : पुनपुन नदी की बाढ़ से 200 एकड़ सब्जी की फसल बर्बाद, किसानों को 50 लाख का नुकसान; मुआवजे की मांग
उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन की बढ़ती लागत, फसलों का वाजिब दाम न मिलना, प्राकृतिक आपदाएं और फसल बीमा के नाम पर छलावा आज किसानों के सामने मुख्य समस्याएं हैं. सरकार खेती को कॉरपोरेट घरानों के हाथों में सौंपना चाहती है, जिसका सीधा नुकसान आम किसानों को हो रहा है.
आपदा पीड़ित किसानों की उपेक्षा पर बोले सांसद
सांसद ने कहा कि बाढ़ व सुखाड़ जैसी आपदाओं से सबसे ज्यादा गरीब और किसान प्रभावित होते हैं, लेकिन केंद्र व राज्य सरकार से उन्हें पर्याप्त राहत नहीं मिलती.
उन्होंने किसानों से एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया और भरोसा दिलाया कि किसानों के हक के लिए सड़क से लेकर सदन तक आवाज उठाई जाएगी.
