औरंगाबाद. दाउदनगर नगर पर्षद क्षेत्र में स्वच्छता और सुव्यवस्था के नाम पर बनाया गया मीट-मछली मार्केट आज खुद अव्यवस्था का शिकार है. कुछ साल पहले बड़े दावों के साथ इस मार्केट का निर्माण किया गया था, ताकि शहर की सड़कों को अतिक्रमण और गंदगी से मुक्त रखा जा सके. नगर पर्षद रोड पर बने इस मार्केट में करीब दो दर्जन दुकानदारों को बकायदा जगह भी आवंटित की गयी थी. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह मार्केट अब एक ”सफेद हाथी” बनकर रह गया है और मछली विक्रेता आज भी सड़क किनारे ही अपनी दुकानें सजा रहे हैं.
सड़क पर जाम और बदबू से लोगों की फजीहत
मछली विक्रेताओं के सड़क पर अतिक्रमण करने के कारण सुबह और शाम के समय इलाके में भारी भीड़ और भीषण जाम की स्थिति बन जाती है. रही-सही कसर मछली खरीदने आने वाले ग्राहक पूरी कर देते हैं, जो अपनी बाइक और वाहन बेतरतीब ढंग से सड़क पर ही खड़ी कर देते हैं. इसके अलावा, सड़क पर कटने वाली मछलियों के कचरे से पूरे इलाके में गंदगी का अंबार लगा रहता है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पर्षद द्वारा इलाके में नियमित सफाई नहीं कराई जाती है, जिससे हर समय उठने वाली बदबू और संक्रमण के खतरे ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है.छात्र-छात्राओं को हो रही सबसे ज्यादा परेशानी
इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा खामियाजा स्कूली बच्चों को उठाना पड़ रहा है. इस मार्केट के ठीक आसपास महिला महाविद्यालय, दाउदनगर और मध्य विद्यालय संख्या एक जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान स्थित हैं. यहां पढ़ने आने वाले छात्र-छात्राओं को रोजाना इसी बदबूदार और जाम से भरी सड़क से होकर गुजरना पड़ता है.दुकानदारों के अपने तर्क, लोगों की अपनी मांग
सड़क पर दुकान लगाने को लेकर मछली विक्रेताओं का दावा है कि मार्केट में उन्हें पर्याप्त जगह नहीं दी गई है, जिस मजबूरी में उन्हें सड़क पर आना पड़ता है. वे अपने स्तर पर कचरा निस्तारण का भी दावा करते हैं, जो जमीन पर कहीं नजर नहीं आता. वहीं, इस रोज-रोज की समस्या से आजिज आ चुके स्थानीय नागरिकों ने अब मांग तेज कर दी है कि घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में मीट-मछली मार्केट का होना ही अनुचित है. प्रशासन को चाहिए कि वह शहर से बाहर एक नया और व्यवस्थित मार्केट विकसित करे, ताकि लोगों को जाम और बीमारियों के खतरे से निजात मिल सके.रिपोर्ट: ओम प्रकाश
