Aurangabad News : ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से औरंगाबाद जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने जिले की प्रत्येक पंचायत में विधिक सेवा केंद्र (लीगल सर्विसेज सेंटर) स्थापित करने की दिशा में पहल शुरू कर दी है. इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल की अध्यक्षता में जिला पंचायती राज पदाधिकारी मो. इफ्तिखार अहमद तथा जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्वेता प्रियदर्शिनी के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई. बैठक में पंचायतों के चयन, केंद्रों की स्थापना, संचालन, आधारभूत संरचना, विभागीय समन्वय और जन-जागरूकता कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा हुई.
पंचायत स्तर तक पहुंचेगी विधिक सहायता
बैठक में सचिव तान्या पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, पटना के निर्देशानुसार पंचायत स्तर तक विधिक सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक कारणों से कोई भी नागरिक न्याय पाने से वंचित न रहे. उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर स्थापित होने वाले विधिक सेवा केंद्र ग्रामीण जनता और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेंगे तथा न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करेंगे.
चरणबद्ध तरीके से स्थापित होंगे केंद्र
बैठक के दौरान पंचायतों के चयन की प्रक्रिया पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया. पंचायत भवनों की उपलब्धता, आधारभूत सुविधाओं, स्थानीय आवश्यकताओं और प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्णय लिया गया कि पंचायतवार चरणबद्ध तरीके से विधिक सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे. संबंधित विभागों से आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया, ताकि चयनित पंचायतों में केंद्रों का संचालन जल्द शुरू किया जा सके.
मुफ्त कानूनी परामर्श से लेकर लोक अदालत तक मिलेगी सुविधा
सचिव तान्या पटेल ने बताया कि इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण नागरिकों को निःशुल्क विधिक परामर्श, निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, प्री-लिटिगेशन मामलों का समाधान, मध्यस्थता, पीड़ित प्रतिकर योजना, महिला एवं बाल अधिकार, घरेलू हिंसा, बाल विवाह निषेध, दहेज प्रतिषेध, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार, श्रमिकों के अधिकार, दिव्यांगजन अधिकार, उपभोक्ता अधिकार, साइबर अपराध से बचाव, मोटर दुर्घटना दावा, बैंक ऋण संबंधी विवाद, पारिवारिक विवाद, भूमि एवं राजस्व संबंधी मामलों तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी और सहायता स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जाएगी. उन्होंने बताया कि पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने, विधिक सहायता के आवेदन तैयार कराने, आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में मार्गदर्शन देने तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से समन्वय स्थापित करने की सुविधा भी मिलेगी. इससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी कानूनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय आने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाएगी.
पीएलवी और पैनल अधिवक्ताओं की होगी तैनाती
जिला पंचायती राज पदाधिकारी मो. इफ्तिखार अहमद ने पंचायत स्तर पर विधिक सेवा केंद्रों की स्थापना के लिए पंचायत भवनों और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने तथा पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग से योजना को सफल बनाने का आश्वासन दिया. वहीं जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्वेता प्रियदर्शिनी ने योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाने तथा प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक जानकारी पहुंचाने में सहयोग देने की बात कही. सचिव ने बताया कि केंद्रों के प्रभावी संचालन के लिए शीघ्र ही पारा विधिक स्वयंसेवकों (पीएलवी) और पैनल अधिवक्ताओं की प्रतिनियुक्ति की जाएगी. निर्धारित तिथियों पर ये सभी केंद्रों में उपस्थित रहकर आम नागरिकों को निःशुल्क विधिक परामर्श और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएंगे.
गांव-गांव में चलेंगे विधिक जागरूकता अभियान
उन्होंने कहा कि पारा विधिक स्वयंसेवक ग्रामीण क्षेत्रों में विधिक जागरूकता अभियान चलाएंगे, पात्र लाभार्थियों की पहचान करेंगे तथा महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, श्रमिकों और अन्य कमजोर वर्गों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. वहीं पैनल अधिवक्ता पात्र व्यक्तियों को न्यायालयीन सहायता, प्री-लिटिगेशन मामलों के समाधान, मध्यस्थता और लोक अदालत के माध्यम से विवादों के सौहार्दपूर्ण निस्तारण में सहयोग करेंगे. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रत्येक पंचायत में समय-समय पर विधिक जागरूकता शिविर, विधिक साक्षरता कार्यक्रम, महिला एवं बाल अधिकार जागरूकता अभियान, साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम, नशा मुक्ति अभियान, पर्यावरण संरक्षण, उपभोक्ता अधिकार और वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इन कार्यक्रमों में पंचायत प्रतिनिधियों, जीविका समूहों, आंगनबाड़ी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ताओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा.
'सबके लिए न्याय' के लक्ष्य को मिलेगा बल
बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने इस योजना को ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया. अंत में सचिव तान्या पटेल ने कहा कि पंचायत स्तर पर विधिक सेवा केंद्रों की स्थापना से आम नागरिकों को न्याय उनके द्वार तक उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ी सफलता मिलेगी. यह पहल विशेष रूप से गरीब, असहाय, महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और समाज के कमजोर वर्गों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी. उन्होंने सभी विभागों, पंचायत प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से इस जनहितकारी अभियान में सक्रिय सहयोग करने की अपील की, ताकि 'सबके लिए न्याय' के लक्ष्य को साकार किया जा सके.
