औरंगाबाद: कुटुंबा में सूखती नहरों को कोयल नदी का सहारा, धान की फसल पर संकट के आसार

झारखंड में बारिश की कमी से कोयल नदी का जलस्तर गिरा, भीम बराज से पानी की आवक कम होने से औरंगाबाद के किसानों की धान की फसल पर संकट मंडरा रहा है।

Aurangabad News : दक्षिणी बिहार के औरंगाबाद जिले के कुटुंबा समेत कई इलाकों में इस बार कमजोर मानसून का असर अब साफ दिखने लगा है. उत्तर कोयल सिंचाई परियोजना पर पानी की कमी का सीधा प्रभाव पड़ रहा है. झारखंड के जलग्रहण क्षेत्रों में बीते करीब एक सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण उत्तर कोयल नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है.

बारिश थमने से नदियां हुई सुस्त

जानकारी के अनुसार गुमला, लोहरदगा, लातेहार, पलामू, हजारीबाग और रांची के पठारी क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से बारिश नहीं हुई है. इसका असर उत्तर कोयल नदी पर साफ दिख रहा है. नदी की सहायक नदियां औरंगा, अमानत और बूढ़ा भी लगभग सूखने की स्थिति में पहुंच रही हैं. पानी की कमी का असर मोहम्मदगंज स्थित भीम बराज पर भी पड़ा है, जहां रविवार से जलस्तर लगातार गिर रहा है.

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बराज में पानी की आवक काफी कम हो गई है. यदि अगले तीन से चार दिनों के भीतर ऊपरी इलाकों में अच्छी बारिश नहीं होती है, तो मुख्य नहर में निर्धारित जल प्रवाह बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा.

धान रोपनी पर मंडराने लगा खतरा

औरंगाबाद जिले के कुटुंबा, नवीनगर, देव, बारुण और आसपास के प्रखंडों में पहले ही बारिश की कमी के कारण धान की रोपनी प्रभावित रही है. अब स्थिति और गंभीर हो सकती है. जिन किसानों ने किसी तरह सिंचाई के सहारे रोपनी पूरी कर ली है, वे भी अब नहर के पानी पर निर्भर हैं.

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त के शुरुआती दिनों में यदि अच्छी बारिश नहीं हुई, तो खरीफ फसलों की पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है. किसान फिलहाल आसमान की ओर टकटकी लगाए मानसून के सक्रिय होने का इंतजार कर रहे हैं.

नहरों में घटा डिस्चार्ज, विभाग की बढ़ी चिंता

भीम बराज से इस समय आरएमसी में करीब 2119 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, लेकिन इसमें से बिहार को कम पानी मिल पा रहा है. अधिकारियों के अनुसार करीब 1188 क्यूसेक पानी बिहार तक पहुंच रहा है, जबकि झारखंड हिस्से के 103 आरडी पर यह घटकर करीब 944 क्यूसेक रह जा रहा है.

आगे अंबा डिवीजन को 485 क्यूसेक पानी दिया जा रहा है, जिसमें से 185 क्यूसेक वहीं उपयोग हो रहा है और लगभग 300 क्यूसेक पानी सदर डिवीजन की ओर भेजा जा रहा है. स्थिति यह है कि किसी भी डिवीजन को उसकी पूरी क्षमता के अनुसार पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है.

क्या कहते हैं चीफ इंजीनियर

जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर अर्जुन प्रसाद सिंह ने बताया कि उत्तर कोयल नहर अभी पूरी तरह बरसाती नहर है और इसका संचालन बारिश पर निर्भर करता है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार और बिहार सरकार मिलकर इस परियोजना के सभी ढांचों का री-मॉडलिंग करा रही हैं.

उन्होंने यह भी बताया कि कुटकू डैम में गेट लगने के बाद पानी का बेहतर प्रबंधन संभव होगा, जिससे किसानों को भविष्य में राहत मिलेगी.

किसानों की बढ़ी बेचैनी

फिलहाल हालात ऐसे हैं कि अगर जल्द ही बारिश नहीं हुई, तो धान की फसल पर गंभीर असर पड़ सकता है. किसानों की मेहनत और उम्मीद दोनों दांव पर लगी हुई हैं. प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन असली राहत अब मानसून की मेहरबानी पर ही टिकी है.


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By Ambuj kumar

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