हरितालिका तीज को लेकर औरंगाबाद के बाजारों में बढ़ी रौनक, श्रृंगार से लेकर मिठाइयों की बढ़ी मांग, जानिए 14 सितंबर के व्रत में किन गलतियों से बचना है जरूरी

इस साल हरितालिका तीज 14 सितंबर को मनाई जाएगी, जिसमें सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखेंगी. जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और खास विधि.

Hartalika Teej 2026 : औरंगाबाद में हरितालिका तीज को लेकर बाजारों में अभी से रौनक बढ़ने लगी है. सुहागिन महिलाएं नए कपड़े, आभूषण और श्रृंगार का सामान खरीदने में जुटी हैं. घरों में भी व्रत और पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं. इस बार 14 सितंबर सोमवार को महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हुए हरितालिका तीज का व्रत रखेंगी.

सनातन धर्म परंपरा में तीज का विशेष महत्व माना जाता है. यह व्रत दांपत्य जीवन की सुख-शांति, पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए किया जाता है. ज्योतिर्विद डॉ. हेरम्ब कुमार मिश्र के अनुसार, हरितालिका तीज प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि को मनाई जाती है. इस वर्ष तृतीया तिथि रविवार सुबह 7 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर सोमवार सुबह 7 बजकर 14 मिनट तक रहेगी.

चतुर्थी युक्त तृतीया में व्रत का विधान

डॉ. हेरम्ब कुमार मिश्र ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार दूसरे दिन पड़ने वाली तृतीया तिथि में चतुर्थी का संयोग हो तो उसी दिन व्रत किया जाता है. निर्णय सिंधु का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि "चतुर्थी सहिता या तु सा तृतीया फलप्रदा". इसी आधार पर उदयातिथि को महत्व देते हुए सोमवार को हरितालिका तीज का व्रत रखा जाएगा.

उन्होंने बताया कि इस दिन व्रती अपनी सुविधा के अनुसार पूजा कर सकती हैं. तृतीया तिथि की स्वामी माता गौरी और चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश माने गए हैं. मान्यता है कि इस दिन माता गौरी की गोद में भगवान गणेश विराजमान होते हैं, इसलिए यह संयोग विशेष पुण्यदायक माना जाता है.

निर्जला व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा

हरितालिका तीज के दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला उपवास रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं. भजन-कीर्तन के साथ यथासंभव रात्रि जागरण भी किया जाता है. यह व्रत पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाता है.

मान्यता के अनुसार, तीज व्रत करने से दांपत्य जीवन सुखी होता है और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. कई जगह कुंवारी कन्याएं भी मनचाहे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं. स्नान आदि से निवृत्त होकर महिलाएं श्रृंगार करती हैं और विधि-विधान से पूजा के साथ तीज व्रत की कथा सुनती हैं.

माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए किया था व्रत

हरितालिका व्रत की कथा माता पार्वती और भगवान शिव से जुड़ी है. मान्यता है कि माता पार्वती ने सबसे पहले भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए यह कठिन तप किया था.

कथा के अनुसार, राजा हिमाचल अपनी पुत्री पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे. लेकिन पार्वती भगवान शिव को अपने मन में पति के रूप में स्वीकार कर चुकी थीं. उनकी इच्छा पूरी कराने के लिए सखियां उन्हें हरण कर घने जंगल में ले गईं.

ज्योतिषवीर्य डॉ हेरंब मिश्रा

वहां माता पार्वती ने कठिन तपस्या की और भाद्रपद शुक्ल तृतीया को बालू से भगवान शिव की प्रतिमा बनाकर विधि-विधान से पूजा की. सखियों द्वारा हरण किए जाने के कारण ही इस व्रत का नाम हरितालिका पड़ा. बिहार के अलावा राजस्थान, झारखंड और मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में महिलाएं इस व्रत को रखती हैं. विदेशों में रहने वाली भारतीय महिलाएं भी अब विधि-विधान से हरितालिका तीज मनाती हैं. डॉ. मिश्र के अनुसार, मंगलवार को सूर्योदय के बाद स्नान और पूजा करने के बाद व्रती महिलाएं व्रत का पारण करेंगी.

तीज में इन नियमों का रखना होगा ध्यान

आचार्य रजनीश पाण्डेय और अरुण मिश्रा ने बताया कि तीज व्रत में धार्मिक नियमों का पालन जरूरी होता है. इस दौरान यथासंभव श्रृंगार प्रसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है. काले रंग के कपड़े, काली बिंदी और काली चूड़ियां वर्जित मानी जाती हैं.

सुहागिन महिलाओं के लिए मांग में सिंदूर रखना भी जरूरी माना गया है. इसके अलावा परिवार के अन्य सदस्यों को तामसी भोजन से परहेज करने की सलाह दी जाती है.

बाजारों में बढ़ी खरीदारी

तीज को लेकर बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई है. महिलाएं आभूषण, श्रृंगार प्रसाधन और नए कपड़ों की खरीदारी के लिए दुकानों पर पहुंच रही हैं. पर्व को लेकर बाजारों में खरीदारी का सिलसिला तेज हो गया है.

तीज के साथ गणेशोत्सव की शुरुआत

चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि होने के कारण गणेशोत्सव का आरंभ भी इसी दिन से होगा. चौथ के चंद्रमा का दर्शन निषिद्ध माना जाता है. मान्यता है कि चंद्रमा का दर्शन करने से बेवजह किसी तरह के कलंक का भय रहता है. भूलवश चंद्रदर्शन हो जाए तो भगवान श्रीहरि का नाम स्मरण करने की मान्यता है.

सोमवार को दिन में 1 बजकर 22 मिनट पर सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. स्त्री स्त्री सूर्य योग, मंडूक वाहन और वह्नि नाड़ी के कारण बादल मंडराने और बिजली कड़कने की संभावना बतायी गई है, जबकि बारिश बहुत हल्की होने की संभावना जतायी गई है.

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By अंबुज कुमार

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