राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर औरंगाबाद में लगी प्रदर्शनी, स्थानीय उत्पादों ने बटोरी सराहना

Aurangabad News : तेलहारा गांव में हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी आयोजित की गई. बुनकरों को स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं के जरिए आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया.

Aurangabad News : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर शुक्रवार को कुटुंबा प्रखंड के तेलहारा गांव में निरंजनपुर-डुमरा-जगदीशपुर प्राथमिक कंबल बुनकर सहयोग समिति लिमिटेड की ओर से प्रदर्शनी-सह-बिक्री केंद्र का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार तौलिया, चादर, गमछा, कंबल तथा अन्य वस्त्र उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई. इस दौरान बुनकरों को रोजगार, प्रशिक्षण और विपणन से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई.

हथकरघा उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी : महाप्रबंधक

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक संजीव कुमार ने कहा कि हथकरघा उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी है. सरकार पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने और स्वरोजगार के अवसर सृजित करने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है. उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण युवा और महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं.

सामर्थ्य योजना से महिलाओं को मिला रोजगार

महाप्रबंधक ने बताया कि सामर्थ्य योजना के तहत पिछले वर्ष कुटुंबा और नवीनगर प्रखंड की 30 महिलाओं को बुनकर सेवा केंद्र, भागलपुर में प्रशिक्षण दिया गया था. प्रशिक्षण प्राप्त महिलाएं अब अपने स्तर पर उत्पादन कार्य कर रही हैं और अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है.

छह मशीनों पर तैयार हो रहे हैं विभिन्न उत्पाद

सहयोग समिति के संचालक रामदयाल पाल ने बताया कि वर्ष 2016 से संचालित हैंडलूम इकाई में वर्तमान में छह मशीनों के माध्यम से तौलिया, चादर, गमछा, पैंट एवं कुर्ता-पायजामा के कपड़े के अलावा भेड़ के ऊन से कंबल का निर्माण किया जा रहा है. इस इकाई से प्रत्यक्ष रूप से 10 लोगों को रोजगार मिला है. उन्होंने बताया कि इच्छुक युवा और महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उत्पादन कार्य से जोड़ा जा रहा है. भविष्य में रेडीमेड कुर्ता-पायजामा के उत्पादन को बड़े पैमाने पर विकसित कर इसे एक ब्रांड के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की योजना है.

बुनकरों ने उठाईं सुविधाओं और विपणन की मांग

रामदयाल पाल ने कहा कि जिले में धागे की स्थानीय उपलब्धता नहीं होने से उत्पादन लागत बढ़ जाती है. उन्होंने औरंगाबाद में विपणन की समुचित व्यवस्था विकसित करने तथा भेड़ के ऊन को मुलायम बनाने के लिए मशीन उपलब्ध कराने की मांग की. समर्पण खादी ग्रामोद्योग के सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि संस्था दाउदनगर, ओबरा, कुटुंबा और नवीनगर क्षेत्र में हथकरघा गतिविधियों को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है. ओबरा और दाउदनगर में तैयार कालीन विदेशों तक भेजे जा रहे हैं. वहीं नौघड़ा और नवाडीह गांव की महिलाओं को कताई, बुनाई और सिलाई का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा गया है. वर्तमान में संस्था जिले के करीब 150 महिला एवं पुरुष बुनकरों को रोजगार उपलब्ध करा रही है.

स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता की हुई सराहना

कार्यक्रम में परियोजना प्रबंधक भारत भूषण शर्मा, बीसीओ दिलीप कुमार, बुनकर सेवा केंद्र भागलपुर के निर्दोष कुमार समेत बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष बुनकर उपस्थित रहे. प्रदर्शनी में आए लोगों ने स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना करते हुए हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया.

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By Ambuj kumar

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