Aurangabad News : औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय में जिला जज द्वितीय आनंदिता सिंह ने कुटुंबा थाना कांड संख्या 32/13, एसटीआर 266/13 एवं 84/23 में सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए पांच अभियुक्तों को पांच वर्ष कारावास की सजा सुनाई है. एपीपी मदन प्रसाद ने बताया कि कुटुंबा थाना क्षेत्र के बसडीहा निवासी रमेश राम, प्रमोद राम, विनोद राम, धीरेंद्र राम और लालदेव राम को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई गई है.
अलग-अलग धाराओं में सुनाई गई सजा
अभियुक्तों को भादंवि की धारा 341/149 में एक माह, 323/149 में छह माह, 324/149 में दो वर्ष, 147 में छह माह, 148 में एक वर्ष तथा 307/149 में पांच वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई है. इसके साथ ही सभी अभियुक्तों पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.
चार महिला अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में किया गया दोषमुक्त
अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि सभी पांच अभियुक्तों को उक्त धाराओं में 17 अगस्त 2026 को दोषी करार दिया गया था. वहीं, चार महिला अभियुक्तों चिंता देवी, कुंती देवी, मरच्छी देवी और सुनीता राम को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया था.
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बेटे के साथ मारपीट की सूचना पर पहुंचे थे सूचक
मामले के सूचक विजय राम ने छह अप्रैल 2013 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी. प्राथमिकी में उन्होंने बताया था कि 3 अप्रैल 2013 को करीब 1:30 बजे उन्हें फोन आया कि उनके बेटे जितेंद्र के साथ कुछ लोग मारपीट कर रहे हैं. सूचना मिलने के बाद वह दौड़कर मौके पर पहुंचे. वहां सभी अभियुक्तों ने मिलकर उन पर हमला कर दिया. मारपीट के दौरान उनका सिर फट गया और वह बेहोश हो गए. इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें सदर अस्पताल पहुंचाया.
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जमीन विवाद में हुआ था हमला
मामले की पृष्ठभूमि में जमीन विवाद बताया गया था. चार फरिकदारों को सरकारी पर्चा मिला था और संबंधित जमीन की मापी 12 अप्रैल 2013 को होनी थी. आरोप है कि मापी से पहले ही अभियुक्तों ने विजय राम पर हमला कर दिया था.
दिसंबर 2013 और फरवरी 2016 में हुआ था आरोप गठन
मामले में आरोप गठन की कार्रवाई 4 दिसंबर 2013 और 8 फरवरी 2016 को हुई थी. करीब 13 वर्ष पुराने इस मामले में अदालत ने साक्ष्यों और सुनवाई के बाद पांच अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए अब पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है.
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