औरंगाबाद : केशहर नदी में डूबे 74 वर्षीय किसान का 20 घंटे बाद मिला शव, ग्रामीणों ने मांगा स्थायी पुल

औरंगाबाद के पिपरौरा गांव के पास केशहर नदी में 74 वर्षीय किसान नरेश प्रसाद सिंह की डूबने से मौत हो गई. 20 घंटे की मशक्कत के बाद SDRF टीम ने शव बरामद किया. प्रशासन ने परिजनों को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी है. ग्रामीणों ने नदी पर स्थायी पुल निर्माण की मांग की है.

Aurangabad Keshar River : औरंगाबाद के मदनपुर प्रखंड के पिपरौरा गांव के समीप केशहर नदी में डूबे 74 वर्षीय किसान का शव करीब 20 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शनिवार दोपहर बरामद कर लिया गया.

एसडीआरएफ की टीम और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से गोंगरा छठ घाट के पास शव मिलने के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई. मृतक की पहचान पिपरौरा निवासी नरेश प्रसाद सिंह के रूप में हुई है.

खेती देखकर लौटते वक्त हुआ हादसा

परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, नरेश प्रसाद सिंह शुक्रवार शाम नदी के उस पार स्थित अपने धान के खेत का जायजा लेकर लौट रहे थे. इसी दौरान केशहर नदी पर बने चेक डैम को पार करते समय उनका पैर फिसल गया और वे गहरे पानी में बह गए. नदी में तेज बहाव और अधिक गहराई होने के कारण उनका तत्काल कोई सुराग नहीं मिल सका.

रोते-बिलखते परिजन | Prabhat Khabar Network

एसडीआरएफ ने बरामद किया शव

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण रातभर तलाश में जुटे रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली. शनिवार सुबह स्थानीय विधायक प्रमोद कुमार सिंह, अंचलाधिकारी अकबर हुसैन, थानाध्यक्ष राजेश कुमार, मुखिया धनंजय यादव, सहित कई जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे. बाद में एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया, जिसने ग्रामीणों के सहयोग से कई घंटों की खोजबीन के बाद गोंगरा छठ घाट के पास से शव बरामद किया.

परिजनों को 4 लाख का मुआवजा

शव मिलने के बाद मृतक की पत्नी कलावती देवी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, औरंगाबाद भेज दिया.

तलाशी के दौरान SDRF की टीम

इस बीच रफीगंज विधायक प्रमोद कुमार सिंह भी मौके पर पहुंचे और शोकाकुल परिवार से मिलकर हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया. प्रशासन की ओर से आपदा राहत के तहत मृतक के पुत्र राकेश सिंह को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि का चेक सौंपा गया.

ग्रामीणों ने की पुल निर्माण की मांग

इस हादसे के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. उनका कहना है कि केशहर नदी पर बना चेक डैम ऊंचाई पर है और बरसात के दिनों में तेज बहाव के बीच इसे पार करना जानलेवा साबित होता है. गांव के अधिकांश किसानों की खेती नदी के उस पार होने के कारण उन्हें रोज इसी रास्ते से आना-जाना पड़ता है.

घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि केशहर नदी पर स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. उनका कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है और स्थायी पुल ही इस समस्या का स्थायी समाधान है.

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By विनय सिंह

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