दाउदनगर . अनुमंडल कार्यालय परिसर में आम लोगों की सुविधा के लिए जिला परिषद द्वारा करीब 17 लाख रुपये की लागत से बनाए गए महिला और पुरुष सामुदायिक शौचालय उद्घाटन के 21 महीने बाद भी उपयोग में नहीं आ सके हैं . बिजली कनेक्शन नहीं होने और रखरखाव की व्यवस्था तय नहीं होने के कारण यह सुविधा अब तक बंद पड़ी है .
26 अक्टूबर 2024 को हुआ था उद्घाटन
जानकारी के अनुसार, 26 अक्टूबर 2024 को जिला परिषद अध्यक्ष प्रमिला देवी ने तत्कालीन उप विकास आयुक्त अभ्येंद्र मोहन सिंह और तत्कालीन एसडीओ मनोज कुमार की मौजूदगी में दोनों शौचालयों का उद्घाटन किया था . उस समय बताया गया था कि अनुमंडल मुख्यालय आने वाले लोगों की परेशानी को देखते हुए इनका निर्माण कराया गया है .
बिजली कनेक्शन और रखरखाव बना बड़ी बाधा
निर्माण कार्य पूरा होने के बाद शौचालय में पेयजल की व्यवस्था तो कर दी गई, लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं लगाया गया . इसके अलावा रखरखाव की जिम्मेदारी किस विभाग या संस्था को दी जाए, इस पर सहमति नहीं बन सकी . इसी कारण दोनों शौचालय आज तक चालू नहीं हो पाए हैं .
जिम्मेदारी को लेकर प्रशासनिक पेच
सूत्रों के अनुसार, शुरुआती दौर में नगर परिषद के माध्यम से शौचालयों के रखरखाव की बात कही गई थी, लेकिन अनुमंडल कार्यालय परिसर नगर परिषद क्षेत्र में नहीं आता है . विभागों के बीच समन्वय नहीं होने के कारण मामला लंबित रह गया और आम लोगों को सुविधा नहीं मिल सकी .
अन्य सामुदायिक शौचालय चल रहा, फिर यहां क्यों परेशानी
लोगों का कहना है कि जिला परिषद द्वारा भखरुआं बाजार रोड स्थित नहर पुल के पास सब्जी मंडी में बनाया गया सामुदायिक शौचालय नियमित रूप से संचालित हो रहा है . वहां रखरखाव की जिम्मेदारी नगर परिषद को दी गई है . ऐसे में अनुमंडल कार्यालय परिसर के शौचालयों को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं .
रोजाना पहुंचते हैं सैकड़ों लोग, फिर भी सुविधा से वंचित
अनुमंडल कार्यालय परिसर में अनुमंडल कार्यालय, अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी कार्यालय, अवर निबंधन कार्यालय, कृषि कार्यालय सहित कई महत्वपूर्ण विभाग स्थित हैं . यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, लेकिन शौचालय सुविधा नहीं मिलने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है .
जर्जर होने का ग्रामीणों को सता रहा डर
लोगों ने आशंका जताई है कि यदि जल्द संचालन शुरू नहीं हुआ तो यह शौचालय भी वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री नगर विकास योजना से बने सुलभ शौचालय की तरह बेकार हो सकता है, जो कभी उपयोग में नहीं आया और अब जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है .
क्या कहते हैं जिला परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि
जिला परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि शैलेश कुमार यादव ने बताया कि निर्माण पूरा होने के बाद दोनों शौचालयों को लिखित रूप से अनुमंडल प्रशासन को सौंप दिया गया था और चाबी भी उपलब्ध करा दी गई थी . उन्होंने कहा कि तत्कालीन एसडीओ ने नगर परिषद के माध्यम से रखरखाव कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है .
