औरंगाबाद के ओबरा प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रतनपुर के मनोरा-बाजितपुर स्थित महात्मा बुद्ध का पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थल लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है. ऐतिहासिक महत्व से जुड़े इस स्थल पर प्रत्येक वर्ष आर्द्रा नक्षत्र के अवसर पर करीब 15 दिनों तक मेले का आयोजन होता है.
मेले में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और लोग पहुंचते हैं. वहीं, महात्मा बुद्ध के अनुयायियों का भी इस स्थल पर वर्षभर आना-जाना लगा रहता है.
विकास और सौंदर्यीकरण का अभाव
ग्रामीणों का कहना है कि स्थल के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए यहां बुनियादी सुविधाओं के साथ सौंदर्यीकरण और विकास की आवश्यकता है.
ग्रामीण विश्वनाथ सिंह, आनंद कुमार, गिरजानंद मेहता, रामप्रवेश ठाकुर, कइल राम, सुदामा कुमार, अमरेंद्र कुमार, रामरहेश मेहता, राम पुकार पासवान, श्रीकांत कुमार, सुलभ कुमार, धनंजय मालाकार, विकास कुमार, सुनील कुमार, रामबाबू मेहता सहित अन्य लोगों ने बताया कि कई बार वरीय पदाधिकारी स्थल का निरीक्षण कर चुके हैं. इसके बावजूद अब तक न तो स्थल का अपेक्षित सौंदर्यीकरण हो सका है और न ही इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस पहल दिखाई दी है.
पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा
पंचायत की सरपंच राजश्री शर्मा एवं सरपंच प्रतिनिधि संतोष कुमार शर्मा ने कहा कि महात्मा बुद्ध स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए तो क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की भी बड़ी संभावना है.
प्रखंड स्तर से भेजा गया प्रस्ताव
इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ मनोज कुमार ने बताया कि कुछ दिन पूर्व कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की ओर से प्रस्ताव की मांग की गई थी. प्रखंड स्तर से संबंधित प्रस्ताव विभाग को भेज दिया गया है.
ग्रामीणों की मांग और अपेक्षाएं
ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि ऐतिहासिक स्थल के महत्व को देखते हुए जल्द विकास, सौंदर्यीकरण और पर्यटन की दिशा में आवश्यक पहल की जाए, ताकि क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करने के साथ स्थानीय लोगों को इसका लाभ मिल सके.
