औरंगाबाद के दक्षिणी क्षेत्र में वर्षा ऋतु का पहला चरण समाप्त होने के बावजूद धान की रोपाई की रफ्तार बेहद धीमी है. अधिकांश खेत अब भी परती पड़े हैं. किसानों का कहना है कि उत्तर कोयल मुख्य नहर से रोस्टर के अनुसार पानी नहीं मिलने के कारण सिंचाई प्रभावित हो रही है. एक सप्ताह से बारिश नहीं होने और तेज धूप के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है.
झारखंड में तय हिस्से से अधिक पानी की खपत
जल संसाधन विभाग के अनुसार सोमवार को मोहम्मद भीम बराज से उत्तर कोयल नहर में 2119 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. इसमें झारखंड सीमा के 103 आरडी तक पहुंचते-पहुंचते नवीनगर डिवीजन को केवल 1050 क्यूसेक यानी 49.55 प्रतिशत पानी ही मिल सका. जबकि झारखंड 51.45 प्रतिशत पानी का उपयोग कर रहा है. बिहार-झारखंड विभाजन के समय 90:10 के अनुपात में पानी उपयोग का रोस्टर तय किया गया था. किसानों का आरोप है कि तय व्यवस्था का पालन नहीं होने से बिहार के सिंचाई क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं.
अंबा, नवीनगर और सदर डिवीजन को चाहिए अधिक पानी
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अंबा डिवीजन की नहरों से बारुण, नवीनगर, कुटुंबा और सदर प्रखंड की करीब 23 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है. सभी नहरों का एक साथ संचालन करने के लिए 788 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है. वहीं नवीनगर डिवीजन को 598 क्यूसेक और सदर डिवीजन को 500 क्यूसेक पानी चाहिए, ताकि सिंचाई व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके.
क्रॉस रेगुलेटर अधूरा होने से बढ़ी परेशानी
सुपरिटेंडेंट इंजीनियर संजीव कुमार ने बताया कि नवीनगर डिवीजन की सभी नहरों के संचालन के लिए 598 क्यूसेक तथा सदर डिवीजन के लिए 500 क्यूसेक पानी की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस बार क्रॉस रेगुलेटर और हेड रेगुलेटर का कार्य पूरा नहीं होने के कारण नहर संचालन में तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं. इससे किसानों तक पर्याप्त पानी पहुंचाने में बाधा उत्पन्न हो रही है.
