Aurangabad News : औरंगाबाद जिले में टीबी से जंग लड़ रहे मरीजों को उपचार के दौरान पोषण सहयोग उपलब्ध कराने और अस्पतालों में आने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों के लिए बेहतर प्रतीक्षा सुविधा मुहैया कराने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बेहद महत्वपूर्ण पहल की है.
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिला प्रशासन और बीआरबीसीएल (BRBCL) के बीच शुक्रवार को समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में एक अहम एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किया गया. यह पूरा समझौता जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ.
इस एमओयू के तहत जिले के कुल 1951 चिन्हित टीबी मरीजों को लगातार छह महीने तक पोषणयुक्त आहार किट मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी. इस विशेष किट में खाने का तेल, आटा, सोयाबीन, मूंगफली सहित प्रोटीन और अन्य सभी आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य सामग्रियां शामिल होंगी.
इस योजना का मुख्य उद्देश्य उपचार के दौर से गुजर रहे मरीजों को पर्याप्त पोषण प्रदान करना और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को मजबूत करना है, ताकि वे नियमित दवा के साथ-साथ जल्दी स्वस्थ हो सकें.
अस्पतालों में मरीजों और परिजनों के लिए लगेंगी 200 नई वेटिंग चेयर
इस समझौते के तहत केवल पोषण किट ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है. इसके अंतर्गत जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों एवं उनके परिजनों की सुविधा के लिए कुल 200 ट्रिपल सीटर वेटिंग चेयर की आपूर्ति और स्थापना की जाएगी.
अभी तक अस्पतालों में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण तीमारदारों को भारी परेशानी उठानी पड़ती थी, लेकिन अब इन कुर्सियों के लग जाने से लोगों को प्रतीक्षा के दौरान काफी राहत मिलेगी और उन्हें सुविधाजनक बैठने की व्यवस्था मिल सकेगी.
सीएसआर फंड के तहत उठाया गया सराहनीय कदम
प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह पूरी कल्याणकारी पहल कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी सीएसआर (CSR) फंड के तहत बीआरबीसीएल द्वारा जिला प्रशासन के सक्रिय सहयोग से की जा रही है.
जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाने तथा वर्ष 2025-26 तक देश से टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.
इस महत्वपूर्ण अवसर पर जिला योजना पदाधिकारी अविनाश प्रकाश के साथ-साथ बीआरबीसीएल और एनपीजीसीएल के हेड ऑफ प्रोजेक्ट समेत अन्य संबंधित प्रशासनिक व कंपनी के पदाधिकारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे.
