Aurangabad News: (विश्वनाथ पांडे)
क्लासिकल स्वाइन फीवर बीमारी सूकरों के लिए बेहद घातक मानी जाती है. इस बीमारी का तत्काल समुचित उपचार उपलब्ध नहीं है और टीकाकरण ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है. ऐसे में बीमारी पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए सूकरों का टीकाकरण बेहद जरूरी है.
जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. श्याम किशोर ने बताया कि क्लासिकल स्वाइन फीवर से बचाव के लिए जिले में विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 3650 सूकरों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
15 जून तक चलेगा अभियान
उन्होंने बताया कि टीकाकरण अभियान पिछले सप्ताह से शुरू कर दिया गया है, जो 15 जून तक लगातार जारी रहेगा. अभियान के सफल संचालन के लिए प्रत्येक पंचायत में एक वैक्सीनेटर की प्रतिनियुक्ति की गई है.
सरकार के पशुपालन विभाग द्वारा इंडियन इम्यूनोलॉजिकल कंपनी के निर्मित टीके की सुई नि:शुल्क लगाई जा रही है. टीकाकरण से पूर्व सूकरों की इयर टैगिंग भी की जा रही है.
डोर-टू-डोर लगाया जाएगा टीका
जिला पशुपालन पदाधिकारी ने बताया कि पशुपालकों को आर्थिक क्षति से बचाने और उनके पशुधन को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह 15 दिवसीय अभियान शुरू किया गया है. अभियान के दौरान निजी टीकाकर्मी डोर-टू-डोर जाकर सूकरों को टीका लगाएंगे.
जानलेवा बीमारी है क्लासिकल स्वाइन फीवर
उन्होंने बताया कि इस बीमारी को “सूकर प्लेग” भी कहा जाता है. बीमारी होने पर सूकरों में तेज बुखार, पीले रंग का दस्त, उल्टी, सुस्ती, चलने में लड़खड़ाहट, आंखों से पानी आना, गर्भपात तथा त्वचा का रंग लाल या बैंगनी पड़ने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. कई मामलों में बीमारी के कारण सूकरों की मौत भी हो जाती है.
जिला पशुपालन पदाधिकारी ने सभी सूकर पालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं का अनिवार्य रूप से टीकाकरण कराएं, ताकि जानलेवा बीमारी से बचाव हो सके.
