औरंगाबाद में तेजी से बढ़ रहे ‘रिजॉर्ट कल्चर’, रातभर डीजे की आवाज से परेशान हो रहे लोग, डॉक्टरों ने भी चेताया

शहर में इन दिनों “रिजॉर्ट कल्चर” तेजी से फैलता जा रहा है.शादी-विवाह, सगाई, जन्मदिन पार्टी और वैवाहिक वर्षगांठ जैसे आयोजनों के लिए लोग बड़े पैमाने पर रिजॉर्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं.

Aurangabad News: (औरंगाबाद से सुजीत कुमार सिंह) शहर में इन दिनों “रिजॉर्ट कल्चर” तेजी से फैलता जा रहा है.शादी-विवाह, सगाई, जन्मदिन पार्टी और वैवाहिक वर्षगांठ जैसे आयोजनों के लिए लोग बड़े पैमाने पर रिजॉर्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं. अब यही रिजॉर्ट आसपास रहने वाले लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं.

गंभीर हो रही स्थिति

शहरी इलाके में आबादी के बीच संचालित रिजॉर्ट देर रात तक तेज आवाज, डीजे और आतिशबाजी के कारण लोगों की नींद और स्वास्थ्य पर असर डाल रहे हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार औरंगाबाद शहर के लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में करीब 40 रिजॉर्ट संचालित हो रहे हैं.शहर का शायद ही कोई इलाका बचा हो जहां रिजॉर्ट नहीं खुला हो. कई रिजॉर्ट घनी आबादी और तंग गलियों के बीच चल रहे हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है.

कई मोहल्लों में घरों के बीच चल रहे रिजॉर्ट

शहर के सिन्हा कॉलेज रोड, क्षत्रिय नगर, सत्येंद्र नगर, टिकरी रोड, क्लब रोड और शाहपुर जैसे मोहल्लों में बड़ी संख्या में रिजॉर्ट संचालित हो रहे हैं. इनमें से कई ऐसे हैं जो रिहायशी मकानों के बिल्कुल बीच में बने हुए हैं. आयोजन के दौरान सैकड़ों वाहनों की आवाजाही, सड़क जाम, पार्किंग की समस्या और रातभर बजने वाले डीजे से आसपास के लोग परेशान रहते हैं. स्थानीय निवासियों का कहना है कि सबसे अधिक दिक्कत उन परिवारों को होती है जिनके घर रिजॉर्ट के सामने या 500 मीटर के दायरे में हैं. बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, बुजुर्गों और मरीजों को रातभर परेशानी झेलनी पड़ती है. कई बार देर रात तक शराब पीकर हंगामा करने और सड़क पर हुड़दंग की शिकायतें भी सामने आती हैं.

बोलने से बच रहे लोग, दबंगों का बताया जा रहा प्रभाव

मोहल्ले के कई लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अधिकांश रिजॉर्ट प्रभावशाली और दबंग लोगों के हैं. यही कारण है कि लोग खुलकर विरोध करने से बचते हैं. शिकायत करने पर विवाद या दुश्मनी बढ़ने का डर बना रहता है. कुछ लोगों ने बताया कि कई बार पुलिस तक शिकायत पहुंची, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई.

नियम-कानून क्या कहते हैं

अधिवक्ता संजय कुमार सिंह ने बताया कि भारत सरकार के “ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 के अनुसार रिहायशी इलाकों में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और तेज ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल पर रोक है. सर्वोच्च न्यायालय ने भी कई फैसलों में साफ कहा है कि किसी व्यक्ति को शोर फैलाकर दूसरे की शांति और स्वास्थ्य प्रभावित करने का अधिकार नहीं है. इसके अलावा बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के अनुसार किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के संचालन में ध्वनि मानकों का पालन जरूरी है. रिहायशी क्षेत्रों में निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि उत्पन्न करना नियमों का उल्लंघन माना जाता है.

जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि आबादी के बीच तेजी से बढ़ते रिजॉर्ट और उनसे होने वाली परेशानियों पर जिला प्रशासन का ध्यान नहीं है. कई रिजॉर्ट बिना पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था और मानक सुविधाओं के संचालित हो रहे हैं. इसके बावजूद जांच या कार्रवाई नहीं हो रही है.शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन को रिहायशी इलाकों में संचालित रिजॉर्ट की जांच करानी चाहिए. साथ ही देर रात डीजे और तेज आवाज पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए, ताकि लोगों को शांति और सुरक्षित वातावरण मिल सके.

तेज शोर और ध्वनि प्रदूषण से हो सकती हैं ये बीमारियां

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉक्टर आशुतोष कुमार ने बताया कि लगातार तेज आवाज, डीजे और ध्वनि प्रदूषण का असर केवल कानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है. चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय तक कानफोड़ू आवाज के संपर्क में रहने से कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं.
प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएं
सुनने की क्षमता कमजोर होना
कान में लगातार आवाज गूंजना (टिनिटस)
उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर)
हृदय रोग का खतरा बढ़ना
अनिद्रा और नींद में बाधा
तनाव और चिड़चिड़ापन
माइग्रेन और सिरदर्द
मानसिक बेचैनी और अवसाद
बच्चों में पढ़ाई और एकाग्रता पर असर
बुजुर्गों और मरीजों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ना
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लगातार अधिक ध्वनि स्तर में रहना मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है. विशेष रूप से रात के समय तेज आवाज शरीर और मस्तिष्क को पर्याप्त आराम नहीं करने देती, जिससे कई दीर्घकालिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

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Published by: Sakshi Kumari

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