Aurangabad News : महिला डॉक्टर की कमी से प्रसूताओं की हो रही परेशानी

Aurangabad News: महज तीन डॉक्टर के भरोसे चल रहा ओबरा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

ओबरा़ जिस अस्पताल में हजारों की आबादी निर्भर है. हर दिन सैकड़ों मरीज किसी ने किसी इलाके से इलाज कराने पहुंचते है और अगर वहां इलाज की समुचित सुविधा उपलब्ध न हो या डॉक्टरों की कमी की वजह से उनके इलाज में परेशानी हो तो समझा जा सकता है कि स्थिति कितनी भयावह है. हम बात कर रहे है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओबरा की. अस्पताल के भवन और व्यवस्था को देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल है कि यहां डॉक्टरों की कमी है. आश्चर्य की बात तो यह है कि मात्र तीन डॉक्टर के भरोसे इस अस्पताल का संचालन हो रहा है. इस मामले में न तो स्थानीय जनप्रतिनिधि का ध्यान है और न ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का. जानकारी मिली कि हर दिन 200 से 300 मरीज यहां इलाज कराने पहुंचते है. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विक्रम सिंह को छोड़कर डॉक्टर शशिकांत, डॉ सौरभ कुमार व डॉ रवि शंकर ही पदस्थापित हैं. हालांकि, डॉ सौरभ कुमार अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लालारों में पदस्थापित हैं. समझ सकते हैं कि तीन डॉक्टर के भरोसे कैसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन हो रहा है.

कई विभाग में खाली है पद

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्रेसर का पद है लेकिन ड्रेसर नहीं है. फार्मासिस्ट भी नहीं है. यहां 16 नर्स का पद है लेकिन मात्र चार नर्स ही पदस्थापित है. उनके द्वारा प्रसूता महिलाओं की डिलीवरी से लेकर अन्य कार्य किए जाते हैं. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सर्जन का पद रिक्त पड़ा हुआ है. सर्जन डॉ मनीष कुमार को विभाग द्वारा पदस्थापना तो कर दिया गया है लेकिन पदस्थापन होने के बाद से वह लंबी छुट्टी पर चले गये हैं जिसके कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है. वहीं महिला चिकित्सक नहीं होने के कारण खासकर महिला मरीजों को प्रसव के दौरान काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. हालांकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में साफ -सफाई के प्रति गंभीरता नजर आती है. प्रभात खबर के टीम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का जायजा लिया तो कई मरीजों ने व्यवस्था को कोसा. मरीज नंदकिशोर राम, अवध राम, रेणु देवी, प्रिया कुमारी आदि का कहना था कि साफ-सफाई तो काफी बेहतर है,लेकिन डॉक्टर की कमी की वजह से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जायजा लेने के दौरान स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों ने नाम न छापने के शर्त पर व्यवस्था को अधूरा करार दिया.

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