Aurangabad News : बतरे नदी के पुल पर गार्डवाल नहीं, मंडरा रहा खतरा
Aurangabad News:पुल के समीप गति सीमा निर्धारित करने वाला संकेतक चेतावनी बोर्ड नहीं
By AMIT KUMAR SINGH_PT | Updated at :
कुटुंबा. अंबा–नवीनगर मुख्य पथ स्थित बतरे नदी पर बना पुल इन दिनों यात्रियों के लिए खतरे का कारण बना हुआ है. पुल के दोनों किनारों पर गार्डवाल नहीं होने के कारण यहां से गुजरने वाले लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. उक्त पथ से होकर खासकर आसपास के ग्रामीण पैदल हीं यात्रा करते है. इधर गया पटना, वाराणसी, रांची, टाटा व धनबाद आदि बड़े शहरो तक पहुचने वाली सवारी वाहन इसी पथ से गुजरती है. महिला कॉलेज मुड़िला अंबा के प्रिसिंपल दिनेश कुमार सिंह, डॉ अर्जुन कुमार वर्मा, डॉ प्रकाश वर्मा, अजीत कुमार, रवींद्र पांडेय, राजद प्रखंड अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा और बैजनाथ मेहता के अनुसार पुल की चौड़ाई सीमित है. आये दिनों दोनों ओर से वाहनों की तेज रफ्तार आवाजाही बनी रहती है. ऐसे में पैदल चलने वाले यात्रियों को पुल पार करने के दौरान काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. वाहन गुजरते समय लोग सहम जाते हैं. इसका मुख्य वजह है कि पुल के किनारे सुरक्षा के लिए कोई गार्डवाल या रेलिंग नहीं है.कभी-कभी, तो थोड़ी सी चूक किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन जाती है.
बरसात के मौसम में पुल पर फिसलन बढ़ जाने से बढ़ जाता है जोखिम
अंबा-नवीनगर रोड स्थित बतरे नदी के पुल से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे बच्चे, स्कूली छात्र-छात्राएं, महिलाएं और बुजुर्ग आवागमन करते हैं. स्कूल जाने वाले बच्चों के अभिभावक हमेशा आशंकित रहते हैं. क्योंकि, तेज गति से गुजरते वाहन बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन जाता हैं. बुजुर्गों और महिलाओं को संतुलन बनाकर चलने में कठिनाई होती है, वहीं बरसात के मौसम में पुल पर फिसलन बढ़ जाने से जोखिम और भी बढ़ जाता है. अब तक कई लोग इस पुल पर यात्रा के दौरान यात्री वाहनों की टक्कर से असंतुलित होकर पुल से नीचे गिर गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं.कई लोग दुर्घटनाग्रस्त भी हुए है. पिछले दिनों वाराणसी के रथ चालक मो एहसान को पुल से नीचे नदी में चले जाने से मौत हुई थी. इसके बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है. हर बार हादसे के बाद केवल चर्चा होती है, पर स्थायी समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाये जाते. ग्रामीणों ने पुल के दोनों किनारों पर मजबूत गार्डवाल का निर्माण कराने की मांग की है. प्रो ब्रजनंदन पाठक, प्रो संजय कुमार सिंह, प्रो सुनील कुमार, प्रो रामाधार सिंह का कहना है कि पुल के पास गति सीमा दर्शाने वाले संकेतक, चेतावनी बोर्ड और आवश्यकतानुसार स्पीड ब्रेकर बनाकर वाहन चालकों को सतर्क किया जा सकता है. इससे पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी.
पुल के दोनो किनारे हैं स्कूल और कॉलेज
उक्त पथ में पुल के समीप महिला कॉलेज से लेकर कई निजी विद्यालय हैं. ऐसे में बच्चो के साथ-साथ आम लोगो की सुरक्षा के लिए पुल के दोनों किनारे रेलिंग जरूरी है. अंबा पंचायत की मुखिया रूनी सिंह का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता. इधर, दधपा चिल्हकी, सोना बिगहा आदि गांव के ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक ललन राम से लेकर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए जनहित को ध्यान में रखते हुए पुल पर गार्डवाल निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराने की गुहार लगाई है. गौरतलब है कि उक्त पुल ब्रिटिश शासन काल के दौरान निमार्ण कराया था. आज भी पुल की मजबूती और निमार्ण कार्य में इस्तेमाल किए गये मेटेरियल्स की गुणवत्त बरकरार है, सिर्फ रेलिंग की कमी खलिहान रही है.
क्या बताते हैं कार्यपालक अभियंता
पीडब्लूडी के कार्यपालक अभियंता गोपाल सिंह ने बताया कि बतरे नदी का पुल बहुत हीं पुराना है. उस समय यहां की आबादी कम होगी. गार्डवाल का प्रावधान नहीं रहा होगा. अभी पुल से होकर दिन-रात अनवरत वाहनों का परिचालन हो रहा है. पुराने पुल पर गार्डवाल संभव नहीं है. ऐसे में पैदल आवागमन करने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए लोहे के चैनल की रेलिंग बनायी जायेगी.