Aurangabad News: 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान के अंतर्गत सोन नदी के सतही जल पर आधारित औरंगाबाद, सासाराम एवं डेहरी नगरों की महत्वाकांक्षी पेयजलापूर्ति परियोजना की समीक्षा बुधवार को समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित बैठक में की गई. बैठक की अध्यक्षता बिहार सरकार की पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री सह औरंगाबाद की प्रभारी मंत्री रमा निषाद ने की. बैठक में परियोजना की अब तक की प्रगति का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया.
81% से अधिक भौतिक प्रगति, 1420.75 करोड़ की है परियोजना
जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने बताया कि लगभग 1420.75 करोड़ रुपये की लागत से क्रियान्वित यह परियोजना औरंगाबाद, सासाराम एवं डेहरी-ऑन-सोन को सोन नदी से शुद्ध और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ी पहल है. वर्तमान में परियोजना की वित्तीय प्रगति 71.67 प्रतिशत तथा भौतिक प्रगति 81.18 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी है.
समीक्षा के दौरान मंत्री ने एनिकट के पुनर्निर्माण, इंटेक वेल, 206 एमएलडी क्षमता के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP), पंप हाउस तथा पेयजल पाइपलाइन बिछाने के कार्यों की बिंदुवार जानकारी ली. कार्यपालक अभियंता ने बताया कि अधिकांश प्रमुख संरचनात्मक कार्य अंतिम चरण में हैं.
समय-सीमा और गुणवत्ता पर मंत्री का कड़ा निर्देश
प्रभारी मंत्री रमा निषाद ने शेष बचे कार्यों में और तेजी लाने तथा निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि इस योजना के शुरू होने से तीनों शहरों के लाखों नागरिकों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल मिलेगा. उन्होंने सभी संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय बनाकर किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा का त्वरित समाधान करने को कहा.
श्री सीमेंट व NPGCAL को CSR से विकास कार्य करने का निर्देश
बैठक के दौरान मंत्री ने क्षेत्र में कार्यरत औद्योगिक इकाइयों 'श्री सीमेंट' एवं 'एनपीजीसीएल' (NPGCL) के प्रतिनिधियों को कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) मद से जनहित और स्थानीय विकास के कार्यों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया.
जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने अधिकारियों को लगातार मॉनिटरिंग और गुणवत्ता जांच के निर्देश दिए. बैठक में अपर समाहर्ता अनुग्रह नारायण सिंह, संबंधित कार्यपालक अभियंता एवं सभी जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे.
