दाउदनगर से ओम प्रकाश की रिपोर्ट
Aurangabad News : सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है. औरंगाबाद जिले के दाउदनगर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है. यहां मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को हर दिन भय के माहौल में काम करना पड़ रहा है.
छह दशक पुराना भवन: छत से गिर रहा प्लास्टर
बताया जाता है कि दाउदनगर पीएचसी का भवन वर्ष 1963 में निर्मित हुआ था. छह दशक से अधिक पुराने इस भवन की हालत अब बेहद जर्जर हो चुकी है. भवन की छत कई स्थानों पर टूटने लगी है और प्लास्टर गिरने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं. ऐसे में चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और इलाज कराने आने वाले मरीजों के मन में हमेशा किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है.
मजबूरी: महिला वार्ड जर्जर, पुरुष वार्ड में शिफ्ट हो रहीं प्रसूताएं
अस्पताल में सबसे चिंताजनक स्थिति प्रसूता महिलाओं की है. महिला वार्ड की छत अत्यधिक जर्जर होने के कारण वहां मरीजों को रखना सुरक्षित नहीं माना जा रहा है. परिणामस्वरूप, प्रसव के बाद महिलाओं को पुरुष वार्ड में शिफ्ट कर इलाज और देखभाल की व्यवस्था की जा रही है. यही नहीं, प्रसव कक्ष की स्थिति भी काफी खराब बताई जा रही है, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं.
60 लाख का बजट पास, लेकिन धरातल पर काम का इंतजार
हालांकि, लंबे समय बाद जिला प्रशासन का ध्यान इस जर्जर भवन की ओर गया है. बीआरबीसीएल के कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) मद से स्वास्थ्य केंद्र परिसर में मरीजों और उनके परिजनों के बैठने के लिए शेड का निर्माण कराया गया है. इसके अलावा औषधि भंडार कक्ष का निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है.
जानकारी के अनुसार, करीब 60 लाख रुपये से अधिक की लागत से महिला एवं पुरुष वार्ड के साथ चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए नए कक्षों का निर्माण प्रस्तावित है. इस योजना को स्वीकृति मिले कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो सका है.
वर्क ऑर्डर प्रक्रिया अंतिम चरण में
सूत्रों की मानें तो भवन निर्माण विभाग द्वारा निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. अब वर्क ऑर्डर जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. प्रक्रिया पूरी होते ही संबंधित संवेदक द्वारा निर्माण कार्य शुरू कराया जा सकता है. फिलहाल, दाउदनगर पीएचसी की तस्वीर चिंताजनक बनी हुई है. जर्जर भवन में चिकित्सक और कर्मी अपनी जिम्मेदारियां निभाने को मजबूर हैं, जबकि मरीज भी जान जोखिम में डालकर इलाज कराने को विवश हैं. अब स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर कब यह स्वास्थ्य केंद्र भयमुक्त और आधुनिक सुविधाओं से लैस हो सकेगा.
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