Aurangabad News: औरंगाबाद जिले के कासमा थाना क्षेत्र में सोमवार को एक दवा व्यवसायी और उसकी मां के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया. घटना से नाराज व्यापारियों और ग्रामीणों ने पूरे कासमा बाजार को बंद कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने थानाध्यक्ष और चौकीदार को हटाने की मांग करते हुए सड़क पर उतरकर नारेबाजी की.
चौकीदार पर दबंगई और मारपीट का आरोप
जानकारी के अनुसार, कासमा थाना के चौकीदार बनवारी पासवान ने एक दवा दुकानदार पर एक्सपायरी दवा देने का आरोप लगाया. आरोप है कि इसी बात को लेकर चौकीदार ने दुकानदार सुधीर गुप्ता के साथ मारपीट की. स्थानीय लोगों का कहना है कि दवा एक्सपायर नहीं थी, इसके बावजूद चौकीदार ने दबंगई दिखाते हुए कार्रवाई की. विरोध करने पर दुकानदार की मां के साथ भी कथित रूप से बदसलूकी और मारपीट की गई. इसके बाद एक दारोगा द्वारा दुकानदार को थाना ले जाने का भी आरोप लगाया गया है.
बाजार बंद कर सड़क पर उतरे व्यापारी
घटना की खबर फैलते ही व्यापारियों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया. इसके बाद कासमा बाजार की दुकानें बंद हो गईं और बड़ी संख्या में लोग सड़क पर जुट गए. प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि आम लोगों के साथ पुलिस का ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और CCTV फुटेज की मांग
प्रदर्शनकारियों ने चौकीदार बनवारी पासवान के अलावा थानाध्यक्ष अक्षयवर सिंह, पुलिसकर्मी नवीन सिंह और अरुण सिंह पर भी कार्रवाई की मांग की. लोगों ने थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि इससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी.
रंगदारी और धमकी देने के भी लगे आरोप
स्थानीय व्यवसायी महफूज आलम ने कहा कि चौकीदार पर पहले भी कई लोगों के साथ मारपीट करने के आरोप लग चुके हैं. वहीं ऑल इंडिया केमिस्ट एसोसिएशन से जुड़े ज्ञानदत्त पांडे ने आरोप लगाया कि दवा व्यवसायी को एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी जा रही है. उन्होंने चौकीदार पर रंगदारी मांगने और सामान लेकर पैसे नहीं देने का भी आरोप लगाया.
एसडीपीओ के आश्वासन के बाद शांत हुआ प्रदर्शन
इधर बाजार बंद होने की सूचना पर एसडीपीओ आदित्य कुमार मौके पर पहुंचे और लोगों से बातचीत की. ग्रामीणों ने उन्हें हस्ताक्षरयुक्त आवेदन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की. एसडीपीओ ने तीन दिनों के भीतर जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद लोगों का प्रदर्शन शांत हुआ और बाजार की दुकानें खुलनी शुरू हुईं.
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