Aurangabad News: औरंगाबाद जिले में धान अधिप्राप्ति एवं कस्टम मिल्ड राइस (CMR) की आपूर्ति में लापरवाही बरतने वाले पैक्स अध्यक्षों और राइस मिलों के खिलाफ जिला प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. बुधवार को समाहरणालय सभाकक्ष में जिलाधिकारी (DM) अभिलाषा शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में चेतावनी दी गई कि निर्धारित समय-सीमा (31 जुलाई) तक शत-प्रतिशत सीएमआर राज्य खाद्य निगम को जमा न कराने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
31 जुलाई तक शत-प्रतिशत सीएमआर जमा कराने का निर्देश
बैठक में जानकारी दी गई कि जिले में कुल 1,80,901.847 मीट्रिक टन धान अधिप्राप्ति के विरुद्ध 1,22,554.770 मीट्रिक टन सीएमआर उपलब्ध कराया जाना है. इसके एवज में अब तक 1,15,347.892 मीट्रिक टन (94.12%) सीएमआर की आपूर्ति हो चुकी है, जबकि 7,339.397 मीट्रिक टन (253 लॉट) सीएमआर अभी भी लंबित है. जिलाधिकारी ने सभी शेष समितियों और मिलरों को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए 31 जुलाई तक हर हाल में आपूर्ति पूरी करने का निर्देश दिया.
कई पैक्स और राइस मिलों की धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी
समीक्षा के दौरान पिपरा (बारुण), कंचनपुर (ओबरा), बैरांव (कुटुंबा), भरूब (ओबरा), ईटार (रफीगंज), पिपरा (नवीनगर), बौर (रफीगंज), सरसौली (ओबरा) तथा व्यापार मंडल (ओबरा) में आपूर्ति अत्यधिक लंबित पाई गई. इसके अतिरिक्त रवि मिनी राइस मिल, मां अम्बे एग्रो प्रोसेसिंग, आयुष राइस मिल, प्रशांत राइस मिल तथा देवन्ती फूड्स इंडस्ट्रीज़ प्रा. लि. की धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की.
भरूब पैक्स पर केस दर्ज, दधपा पैक्स पर दर्ज होगी FIR
जिला सहकारिता पदाधिकारी ने बताया कि ओबरा प्रखंड के भरूब पैक्स द्वारा लंबे समय से सीएमआर जमा न करने पर थाना में कांड संख्या 229/26 (दिनांक 27 जुलाई 2026) के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है. वहीं कुटुंबा प्रखंड के दधपा पैक्स के खिलाफ भी एफआईआर के लिए सहकारिता प्रसार पदाधिकारी द्वारा थाने में आवेदन दे दिया गया है.
गबन का केस, ब्लैकलिस्टिंग और अगले साल के लिए बैन
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि 31 जुलाई तक सीएमआर जमा न करने वाली समितियों के विरुद्ध सरकारी राशि के गबन का मामला दर्ज कराया जाएगा. ऐसी समितियों को आगामी धान अधिप्राप्ति सत्र से वंचित किया जाएगा और सहकारिता अधिनियम की धारा-41 के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू होगी. इसके साथ ही, लापरवाही बरतने वाली राइस मिलों को ब्लैकलिस्ट (Blacklist) करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी.
