Aurangabad News:(सुजीत कुमार) औरंगाबाद स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत लिपिक कृष्ण प्रसाद वर्मा द्वारा एक ही समय में दो अलग-अलग सरकारी संस्थानों में कार्य कर वेतन लेने के मामले में जिला प्रशासन ने गंभीर रुख अपनाया है. मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने तीन सदस्यीय जांच कमिटी का गठन किया है.
यह कार्रवाई 14 मार्च को प्रकाशित खबर के आलोक में की गई है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के लिपिक पर बिहार और झारखंड के दो अलग-अलग सरकारी संस्थानों से वेतन लेने का आरोप सामने आया था.
तीन सदस्यीय टीम करेगी जांच
डीएम द्वारा गठित जांच टीम में लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी जयप्रकाश नारायण, जिला पंचायत राज पदाधिकारी इफ्तेखार अहमद तथा सदर अस्पताल के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अनवर आलम को शामिल किया गया है.
इससे पूर्व भी जिलाधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग स्तर से मामले की जांच कराई गई थी, जिसकी रिपोर्ट विभाग को भेजी जा चुकी है.
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत लिपिक कृष्ण प्रसाद वर्मा वर्ष 2005 से औरंगाबाद स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं और नियमित रूप से वेतन प्राप्त कर रहे हैं.
इसी बीच भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) में भी उन्होंने 20 नवंबर 2008 को योगदान दिया और वहां जूनियर ओवरमैन के पद पर 13 मार्च 2017 तक वेतन प्राप्त करते रहे.
पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह द्वारा मामले को जिलाधिकारी के संज्ञान में लाए जाने के बाद जांच कराई गई, जिसमें आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए.
बीसीसीएल प्रबंधन ने भी की पुष्टि
भारत कोकिंग कोल लिमिटेड, पूर्वी झरिया क्षेत्र के महाप्रबंधक द्वारा असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, औरंगाबाद को भेजे गए पत्र में पुष्टि की गई है कि कृष्ण प्रसाद वर्मा बीसीसीएल में जूनियर ओवरमैन के पद पर कार्यरत थे. पत्र के अनुसार वे 13 मार्च 2017 से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित हैं और इसको लेकर कोल इंडिया स्तर पर कार्रवाई भी शुरू की गई थी.
वहीं दूसरी ओर कृष्ण प्रसाद वर्मा ने स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम के समक्ष अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया है. हालांकि बीसीसीएल प्रबंधन के पत्र और उनके लिखित पक्ष में स्पष्ट विरोधाभास सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है.
अधिकारियों की मिलीभगत की भी होगी जांच
मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर दोनों विभागों के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना एक व्यक्ति लंबे समय तक दो जगह नौकरी कर वेतन कैसे प्राप्त करता रहा। इसे लेकर भी जांच की संभावना जताई जा रही है.
हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की गठित जांच टीम ने 28 अप्रैल को ही अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी, लेकिन लगभग तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी कृष्ण प्रसाद वर्मा अपने पद पर बने हुए हैं.
क्या कहते हैं सिविल सर्जन
मामले पर सिविल सर्जन डॉ कृष्ण कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम की रिपोर्ट में एक ही समय में दो जगह कार्य कर वेतन लेने की बात सामने आई है. रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई है.
उन्होंने कहा कि अब जिलाधिकारी स्तर से पुनः जांच कमिटी गठित की गई है और जिला प्रशासन तथा विभाग से प्राप्त निर्देशों के अनुसार आगे आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
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